Monday, February 27, 2017

फिर आ रहा है 'बाहुबली'

-सौम्या अपराजिता
एक बार फिर 'बाहुबली' अपनी भव्यता और तकनीकी उत्कृष्टता के साथ दर्शकों को रिझाने आ रहा है। इस बार 'बाहुबली' पहले से ज्यादा शानदार है। तकनीक ने उसे और भी प्रभावशाली बना दिया है। यहां बात हो रही है एस राजामौली की बहुचर्चित और बहुप्रतीक्षित फ़िल्म 'बाहुबली:द कंक्लूजन' अर्थात 'बाहुबली 2' की। पिछले दो वर्षों से बेसब्री से इंतज़ार कर रहे दर्शकों को 'बाहुबली 2' के प्रदर्शन के बाद पता चल जाएगा कि आखिर कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा? दरअसल, दो वर्ष पूर्व प्रदर्शित हुई 'बाहुबली' के बाद इस सवाल के प्रति दर्शकों को जिज्ञासा ने ही एस राजामौली को 'बाहुबली' के  सीक्वल को बनाने की प्रेरणा दी। परिणामस्वरूप 'बाहुबली 2' के निर्माण की योजना बनी और अब दो वर्ष के अथक परिश्रम और बड़े पूँजी निवेश के बाद 'बाहुबली 2' प्रदर्शन के लिए तैयार है।
रिलीज से पहले हिट
उल्लेखनीय है कि एस एस राजामौली की 'बाहुबली 2' ने प्रदर्शन से पूर्व ही सेटेलाइट राइट के जरिए 500 करोड़ का कारोबार कर लिया है। चार भाषाओं तेलुगु, तमिल, मलयालम और हिंदी में एकसाथ प्रदर्शित हो रही 'बाहुबली 2' के विषय में एक और उल्लेखनीय तथ्य है कि करण जौहर की धर्मा प्रोडक्‍शन ने इसके हिंदी संस्करण के अधिकार को 120 करोड़ रुपये में खरीदा है। गौरतलब है कि 'बाहुबली' हिंदी में डब की गई दक्षिण भारत की पहली ऐसी फिल्म थी जिसने बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ का व्यवसाय किया था।
भव्य और शानदार
ज्ञात तथ्य है कि 'कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा?' सवाल के जवाब के कारण 'बाहुबली 2' इस वर्ष की सर्वाधिक बहुप्रतीक्षित फिल्मों में शामिल है। फ़िल्म के प्रति दर्शकों की इसी उत्सुकता को ध्यान में रखते हुए इसे और भी भव्य और तकनीकी रूप से समृद्ध बनाने की कोशिश की गयी है। फ़िल्म के विजुअल इफ़ेक्ट को दमदार और विश्वसनीय बनाने के लिए पूरी ताकत और मेहनत झोंक दी गयी है। 'बाहुबली 2' के विज़ुअल इफ़ेक्ट्स सुपरवाइज़र आरसी कमलाकन्नन के अनुसार,' यह बेहद मुश्किल काम है, लेकिन इससे बहुत संतुष्टि भी मिलती है।'बाहुबली 2' के विज़ुअल इफ़ेक्ट्स का काम हाथ में लिए तक़रीबन 15 महीने हो चुके हैं। लगभग सभी बड़े वीएफ़एक्स स्टूडियो में काम चल रहा है। पोस्ट प्रोडक्शन का काम दुनियाभर के 33 स्टूडियो में चल रहा है।' जहां तक 'बाहुबली 2' के बजट का सवाल है,तो वह भी बेहद उल्लेखनीय है। निर्माता शोबु यरलगड्डा के अनुसार,' बजट का बड़ा हिस्सा इसकी मेकिंग पर खर्च हुआ है। मुझे ख़ुशी है कि पैसा फ़िजूल नहीं गया। 'बाहुबली' की दोनों फ्रेंचाइजी पर लगभग 450 करोड़ का खर्च आया है। कई लोगों ने सोचा कि इतना पैसा खर्च करना बेवकूफ़ी है। मेरे ज़हन में भी ये बात आती थी कि क्या मैं सही काम कर रहा हूं? और सच कहूं तो 'बाहुबली' की रिलीज़ से पहले तक मुझे भी अंदाज़ा नहीं था कि इस तरह के रिटर्न्स मिलेंगे।'
सृजन और तकनीक का तालमेल
'बाहुबली' के बाद 'बाहुबली 2' के कला निर्देशन की भी जिम्मेदारी संभाली है साबू सायरिल ने। 'बाहुबली 2' के लिए उन्होंने अपनी सृजनशीलता को नया और वृहत आयाम दिया है। वे बताते हैं,'बाहुबली' एक बड़ा प्रोजेक्ट था। जब यह प्रोजेक्ट सफल हो गया तो हमें पार्ट 2 में और भी चीजें करने की हिम्मत आ गई। इसलिए पार्ट 2 के लिए मुझे बड़ा बजट और मैटेरियल मिला। बाहुबली के लिए नया साम्राज्य बनाया गया। हालांकि, मैं इसके बारे में ज्यादा जानाकारी शेयर नहीं कर सकता। इन सबके लिए मुझे बहुत ज्यादा रिसर्च करनी पड़ी। अधिकांश लोगों का सोचना था कि 'बाहुबली' में कंप्यूटर ग्राफिक्स का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन ऐसा है नहीं। उदाहरण के तौर पर जब घोड़ा युद्ध में गिरता है तो वह असली नहीं होता। ना ही कंप्यूटर ग्राफिक्स होता है। हम उन घोड़ों को बनाते हैं ताकि उन्हें असली जानवर को बिना नुकसान पहुंचाए हम उन्हें दिखा सकें। हम लोग रियल लुकिंग ह्यूम डमी बनाते हैं जिन्हें युद्ध में गिरते हुए और ऊंचाई से फेंकते हुए देखा जा सकता है। हमने 'बाहुबली-2' के लिए ऐसे हथियार भी बनाए हैं जो कलाकार को नुकसान पहुंचाए बिना असली दिखें।'
इंटरनेट की सेंध
गौरतलब है कि तमाम मेहनत और सावधानी के बाद भी 'बाहुबली 2' का नौ मिनट लंबा वॉर सीक्वेंस पिछले दिनों इंटरनेट पर लीक हो गया था जिस्कर बाद निर्देशक एसएस राजमौली ने हैदराबाद के जुबली हिल्स पुलिस स्टेशन में इस घटना की शिकायत दर्ज करवाई थे। इस शिकायत के चलते पुलिस ने एक ग्राफिक डिजाइनर को फिल्म की फुटेज चुराने को लेकर गिरफ्तार किया। हालांकि, राजामौली ने रिपोर्ट दर्ज करवाकर सीन को इंटरनेट से हटवा दिया, लेकिन उससे पहले यह फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी थी। दरअसल,जब से 'बाहुबली 2' की शूटिंग शुरू हुई है,तब से इस फिल्म के सेट से कुछ-न-कुछ लीक होने की ख़बरें सुर्खियां बनती रही हैं। हालांकि... 'बाहुबली 2' की पटकथा की गोपनीयता के मद्देनजर सेट पर मोबाइल फोन तक बैन कर दिए थे।
कसौटी पर कलाकार
'बाहुबली' में राजा भल्लादेव के किरदार में राणा डुग्गुबाती ने प्रभावी अभिनय किया था। 'बाहुबली 2' में उनका किरदार और भी दमदार होने वाला है। फ़िल्म में अपने किरदार को और असरदार बनाने के लिए राणा ने करीब 5 महीने रोज ढाई घंटे अपनी बॉडी पर मेहनत किया है,वहीँ बाहुबली की केंद्रीय भूमिका निभाने वाले अभिनेता प्रभास भी काफी उत्साहित हैं। प्रभास इस बार 'बाहुबली 2' में बाहुबली और शिवुडु की दोहरी भूमिका निभा रहे हैं। ये दोनों भूमिकाएं एक दूसरे से एकदम अलग है। इन दोनों भूमिकाओं को निभाने के लिए प्रभास ने बेहद चुनौतियां झेली हैं। शिवुडु के किरदार के लिए प्रभास को सामान्य सा दिखना था जिसमे उन्हें अपने शरीर का वजन 80 से 88 किलो रखना था,बाहुबली के किरदार के लिए करीब अपना वजन 105 किलो रखना था। इन दोनों रुपों के लिए प्रभास ने बेहद मेहनत की,साथ-ही-साथ अलग-अलग डाइट चार्ट फॉलो किया।
एक और 'बाहुबली'!
रोचक तथ्य है कि 'बाहुबली' अर्थात 'बाहुबली:द बिगनिंग' और 'बाहुबली 2' अर्थात 'बाहुबली:द कंक्लूजन' के बाद एक और संस्करण निर्माण की दिशा में अग्रसर है। इसका संकेत पिछले दिनों एस एस राजामौली ने 'जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल' में दिया। एसएस राजामौली ने लिटलेचर फेस्टिवल में पुस्तक लॉन्च की जिसमें 'बाहुबली बिगिनिंग' से भी पहले की कहानी कही गई है। यह पुस्तक है-'राइज़ ऑफ़ शिवगामी- बाहुबली बिफोर द बिगिनिंग'। गौरतलब है कि 'राइज़ ऑफ़ शिवगामी' बाहुबली सीरीज़ की पहली बुक है जिसमें 'बाहुबली- द बिगिनिंग' से भी पहले की कहानी कही गई है। इस नॉवल में शिवगामी को अपने पिता की हत्या का बदला लेते हुए दिखाया जाएगा। संभव है कि 'बाहुबली 2' की सफलता के बाद इस पुस्तक की कहानी को फ़िल्म में उकेरने की योजना बने और दर्शक एक बार फिर 'बाहुबली' की रोचक कहानी के नए आयाम को सिल्वर स्क्रीन पर देख पाएं। हालांकि..फ़िलहाल 'बाहुबली 2' अर्थात 'बाहुबली: द कंक्लूजन' के प्रदर्शन पर निगाहें टिकी हैं...क्योंकि यह जानना जरुरी है कि...'आखिर कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा?'

कानून के फ़िल्मी हाथ

-सौम्या अपराजिता
'कानून के हाथ लंबे होते हैं'...मगर जब हमारी फिल्मों में कानून के इन लंबे हाथों को जज और वकील थामने की कोशिश करते हैं,तो कानूनी दांव-पेंच से भरपूर नाटकीय दृश्यों और संवादों की लड़ी-सी लग जाती है। दरअसल,हिंदी फिल्मों में जज के हथौड़े की धमक और वकीलों की बहस हमेशा से बेहद प्रभावी अंदाज में प्रयोग किये जाते रहे हैं। 'जॉली एल एल बी 2' इसका ताज़ा उदहारण है। फ़िल्म में कोर्ट रूम ड्रामा के रीयलिस्टिक अप्रोच को दर्शक बेहद पसंद कर रहे हैं। साथ ही वकील जगदीश्वर मिश्रा बने अक्षय कुमार के कानूनी दांव पेंच के मनोरंजक अंदाज को भी प्रशंसा मिल रही है। अगर कहें कि सुभाष कपूर निर्देशित इस फ़िल्म की सफलता में हिंदी फिल्मों के लोकप्रिय फार्मूले 'कोर्ट रूम ड्रामा' का का योगदान उल्लेखनीय है,तो गलत नहीं होगा। उल्लेखनीय है कि जब-जब कोर्ट रूम ड्रामा के दृश्यों की प्राथमिकता वाली फ़िल्में सिनेमाघरों में आई हैं,दर्शकों की उस फ़िल्म विशेष के प्रति उत्सुकता बढ़ी है।
यदि बीते वर्ष की ही बात करें तो दो सफल फ़िल्मों की कहानी 'रुस्तम' और 'पिंक' अदालती तेवर और कानूनी दांव-पेंच के इर्द-गिर्द बुनी गयी थीं। 'रूस्तम' एक ऐसे नौसेना अधिकारी की कहानी थी जिसे खुद को कोर्ट के सामने बेगुनाह पेश करना होता है। ...तो दूसरी तरफ 'पिंक' पूरी तरह कोर्ट ड्रामा पर आधारित थी जिसमें अमिताभ बच्चन ने ऐसे वकील की भूमिका निभायी थी जो झूठे केस में तीन लड़कियों को बचाता है। इन दोनों ही फिल्मों को दर्शकों ने सर-आँखों पर बिठाया। दरअसल,आम दर्शकों में 'कोर्ट','कचहरी' और 'जज के हथौड़े' का प्रकोप इतना है कि वह इनसे दूर ही रहना चाहता है। रियल लाइफ में इनसे दूर रहने की इच्छा ही फिल्मों में इनके प्रति दर्शकों का रुझान बढ़ाती है। दर्शक रियल लाइफ में तो कोर्ट-कचहरी के चक्कर से दूर रहना चाहते हैं,मगर सिल्वर स्क्रीन पर उन्हें यही कोर्ट रूम ड्रामा बेहद पसंद आता है। रुस्तम के निर्देशक टीनू सुरेश के अनुसार,'कोर्ट के अंदर चलने वाली बहस, वकीलों के तर्क, गवाहों की चालाकी और जज की पैनी नज़र दर्शकों में दिलचस्पी पैदा कर देती है। साथ ही,जब कठघरे में ख़ुद हीरो खड़ा होकर अपनी पैरवी कर रहा हो, तो भला कौन उसे हारता देखना चाहेगा?'
यदि गौर करें तो बीते कुछ वर्षों में कोर्ट रूम ड्रामा वाली फिल्मों ने दर्शकों को खूब रिझाया है जिनमें 'जॉली एलएलबी','शाहिद' और 'ओ माय गॉड' उल्लेखनीय हैं। 'जॉली एलएलबी' में अदालत की गंभीर कार्यवाही को हल्के-फुल्के तरीके से दिखाने की कोशिश की गई,तो 'शाहिद' शाहिद आजमी की जिंदगी पर बनी थी जो देश के खिलाफ साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया जाता है। कुछ साल जेल में बिताने के बाद वह बाहर निकलकर कानून की पढ़ाई करता है और उन लोगों की मदद करता है जिनपर आतंकवाद के झूठे आरोप लगे थे। उधर 'ओ माय गॉड' में भगवान को ही अदालत में लाकर खड़ा कर दिया गया था। सबूतों और दलीलों की कसौटी पर कसी इस फ़िल्म ने दर्शकों को अपने मोहपाश में बांध लिया था। एक दशक पूर्व प्रदर्शित हुई 'ऐतराज' के भी अधिकांश दृश्य कोर्ट रूम में फिल्माए गए थे। अक्षय कुमार, करीना कपूर और प्रियंका चोपड़ा अभिनीत इस फ़िल्म में बेबुनियाद आरोपों से पति को बचाने के लिए एक पत्नी का वकील के किरदार में आना दर्शकों को पसंद आया था।
भारतीय न्याय व्यवस्था से आम नागरिकों की शिकायत को बयां करता 'दामिनी' के लोकप्रिय संवाद 'तारीख़ पे तारीख' को भला कौन भूल सकता है! इस फ़िल्म में क़ानून की सुस्त रफ़्तार और अदालती कार्यवाहियों को लेकर आक्रोश को सही मायनों में सामने रखा गया था। उस दौर में इस फ़िल्म के पूर्व आयी कई फिल्मों की कहानियां कानून और अदालत के इर्द-गिर्द बुनी गयी थीं जिनमें 'मेरी जंग','आज का अंधा क़ानून', 'फ़र्ज़ और क़ानून', 'क़ानून अपना-अपना', 'क़ानून क्या करेगा', 'क़ायदा-क़ानून' और 'कुदरत का क़ानून' जैसी फ़िल्में आयीं जिनमे 'मेरी जंग' सफल रही जबकि शेष फिल्मों को लचर पटकथा के कारण बॉक्स ऑफिस की सफलता से हाथ धोना पड़ा।
दरअसल,हिंदी फिल्मों में कानूनी दांव-पेंच वाले दृश्यों को बी आर चोपड़ा की फ़िल्म 'कानून' के प्रदर्शन के बाद से प्राथमिकता मिलनी शुरू हुई। इस फ़िल्म के बाद तो जैसे निर्माता-निर्देशकों की नजर में अदालत के दृश्य अवश्यम्भावी से हो गए। उसके बाद तो दर्शकों को हर दूसरी-तीसरी फ़िल्म में अदालत में वकीलों की ज़िरह वाले दृश्यों को देखने की आदत-सी हो गयी। रोचक तथ्य है कि अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी अभिनीत 'अँधा कानून' की सफलता के बाद 'कानून' और 'अदालत' जैसे शब्द फिल्मों के दृश्यों के साथ-साथ उसके शीर्षक में भी शामिल हो गए।
यदि कहें कि न्याय व्यवस्था के प्रति आम जनता के असंतोष और आक्रोश के चित्रण के कारण ही कोर्ट रूम ड्रामा वाली फ़िल्में दर्शकों को भाती हैं,तो गलत नहीं होगा। 'अदालत' और 'कानून' के दांव-पेंच से संघर्ष करते फ़िल्मी नायक में दर्शक अपनी छवि देखते हैं और जब वही नायक तमाम संघर्षों से दो-चार होता हुआ न्याय की मंजिल पाता है,तो उसकी जीत में दर्शक अपनी जीत महसूस करते हैं। दरअसल,रील लाइफ में 'कानून' का डर ही रियल लाइफ के 'कानूनी दांव-पेंच' की ओर दर्शकों को आकर्षित करता है।
सिल्वर स्क्रीन पर 'कोर्ट रूम ड्रामा'
*जॉली एलएलबी
*रुस्तम
*पिंक
*शाहिद
*दामिनी
*ऐतराज
*ओ माय गॉड
*कानून
*अंधा कानून

सेट' पर 'दिल मिले'

-सौम्या अपराजिता
फिल्मों और धारावाहिकों की शूटिंग के दौरान अभिनेता-अभिनेत्री प्रत्येक दिन साथ-साथ घंटों बिताते हैं। एक-दूसरे के सुख-दुःख बांटते हैं। धीरे-धीरे उन्हें एक-दूसरे का साथ भाने लगता है।उनके बीच आपसी समझ,सम्मान,स्नेह और विश्वास की भावना पनपने लगती है। ...और इस तरह वे एक-दूसरे के प्रेम पाश में बंधने लगते हैं। जल्द ही वह वक़्त भी आता है जब दिल से मजबूर होकर वे एक-दूसरे को जीवनसाथी बनाने का निर्णय ले लेते हैं। तभी तो,कभी सह-कलाकार रह चुके अभिनेता-अभिनेत्रियों की कई जोड़ियां आज खुशहाल वैवाहिक जीवन बीता रही हैं। एक नजर सिल्वर और स्मॉल स्क्रीन की ऐसी जोड़ियों पर जो पहले सह-कलाकार थे...और आज पति-पत्नी हैं ....
फिल्मों के सेट पर फूटा 'प्यार का अंकुर'-
जया बच्चन-अमिताभ बच्चन
जया बच्चन और अमिताभ बच्चन का परिचय ऋषिकेश मुखर्जी ने अपनी फिल्म 'गुड्डी'के सेट पर कराया था। इस मुलाकात के बाद 'ज़ंजीर' के सेट पर दोनों के बीच नजदिकियां बढ़ीं और इसी फिल्‍म की शूटिंग के दौरान दोनों ने शादी करने का फैसला‌ कर लिया। शालीन और सादे अंदाज में जया संग अमिताभ परिणय सूत्र में बंध गएं।
नीतू सिंह-ऋषि कपूर
ऋषि कपूर और नीतू सिंह की पहली फिल्म 'जहरीला इंसान' थी। इसी फ़िल्म के सेट पर दोनों दोस्त बने और फिर लंबे प्रेम प्रसंग के बाद पति-पत्नी बन गएं। 'जहरीला इंसान' के सेट पर ऋषि अक्सर नीतू को छेड़ते रहते थे। शुरुआती नाराजगी के बाद धीरे-धीरे नीतू को ऋषि की शरारतें रास आने लगी और दोनों करीब आ गए।  'खेल खेल में' के सेट पर ऋषि-नीतू का रिश्ता दोस्ती से प्यार में बदला और फिर सही समय और मौका देखकर दोनों विवाह बंधन में बंध गए।
हेमा मालिनी-धर्मेन्द्र
हेमा मालिनी और धर्मेन्द्र की मुलाकात 1970 में आई फिल्म 'शराफत' के सेट पर हुई थी। कहा जाता है कि 'मैं हसीन तू जवान' के सेट पर दोनों के बीच प्यार भरे रिश्ते की नींव पड़ी। धर्मेंद्र पहले से शादीशुदा और चार बच्चों के पिता थे। इसके बाद भी धर्मेंद्र ने हेमा मालिनी से शादी कर ली और पिछले 36 वर्षों से दोनों का संग-साथ बना हुआ है।
करीना कपूर-सैफ अली खान
'टशन' के सेट पर करीना कपूर और सैफ अली खान एक-दूसरे के प्रेम पाश में बंधे। लद्दाख और राजस्थान में फ़िल्म की शूटिंग के दौरान करीना और सैफ को एक-दूसरे के प्रति प्यार का अहसास हुआ। प्यार के इसी अहसास के बाद दोनों ने शादी का फैसला किया। आज करीना और सैफ अपने नन्हे राजकुमार तैमूर के साथ खुशनुमा वैवाहिक जीवन बीता रहे हैं।
ट्विंकल खन्ना-अक्षय कुमार
जब अक्षय कुमार और ट्विंकल खन्ना 'इंटरनेशनल खिलाडी' और 'जुल्मी' फिल्मों में अभिनय कर रहे थे तब उन्हें नहीं पता था कि इन फिल्मों का सेट उनके शादीशुदा भविष्य की नींव रखेगा। 'इंटरनेशनल खिलाड़ी' के सेट पर अक्षय और ट्विंकल एक-दूसरे के इतने करीब आ गए कि दोनों ने विवाह बंधन में बंधने का फैसला कर लिया। आज दोनों फ़िल्मी दुनिया के सबसे खुशहाल वैवाहिक जोड़ियों में एक एक हैं।
ऐश्वर्या राय बच्चन- अभिषेक बच्चन
अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन ने 'ढाई अक्षर प्रेम के' और 'कुछ न कहो' के सेट पर दोस्ती का रिश्ता बनाया। 'गुरु' के सेट पर दोनों के बीच प्यार का अंकुर फूटा जो 'उमराव जान' के सेट पर पौधा बन गया। इस पौधे को संवारने और निखारने के लिए दोनों ने शादी का फैसला किया। आज बिटिया आराध्या के साथ वैवाहिक जीवन के खुशनुमा पल जी रहे हैं।
जेनेलिया-रितेश देशमुख
जेनेलिया देशमुख और रितेश देशमुख ने 'तुझे मेरी कसम' में पहली बार साथ काम किया और इसी फ़िल्म के सेट पर दोनों के बीच मजबूत रिश्ते की शुरुआत हुई। यह रिश्ता कुछ वर्ष बाद विवाह के खूबसूरत मोड़ पर पहुंच गया।
काजोल-अजय देवगन
अजय देवगन और काजोल की पहली मुलाकात 'हलचल' के सेट पर हुई थी। सेट पर साथ-साथ वक़्त गंवाते हुए दोनों का एक-दूसरे की ओर झुकाव हुआ। उसके बाद लगभग चार वर्षों तक प्रेम सम्बन्ध में बंधने के बाद अजय और काजोल एक सादे समारोह में विवाह बंधन में बंध गए।
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सीरियल के सेट ने 'बना दी जोड़ी'
गौतमी गाडगिल-राम कपूर
राम कपूर और गौतमी गाडगिल की मुलाकात बालाजी टेलेफिल्म्स के धारावाहिक 'घर एक मंदिर' के सेट पर हुई थी। दोनों घंटों सेट पर साथ-साथ रहा करते।  जल्द ही दोनों के दिल में एक-दूसरे के लिए कोमल भावनाएं पनपने लगीं और बिना वक़्त गवाएं गौतमी और राम ने विवाह बंधन में बंधने का फैसला किया। राम और गौतमी के जीवन में पुत्री सिया और पुत्र अक्स खुशियाँ लेकर आए हैं।
देबिना-गुरमीत चौधरी
'रामायण' में आदर्श पति-पत्नी राम-सीता की भूमिका निभाते हुए गुरमीत चौधरी और देबिना को अहसास नहीं था कि एक दिन दोनों निजी जीवन में भी पति-पत्नी की भूमिका निभाएंगे।  'रामायण' की शूटिंग के दौरान चले लम्बे प्रेम प्रसंग के बाद दोनों ने विवाह रचा लिया। 
गौरी प्रधान-हितेन तेजवानी
'कुटुंब' में हितेन तेजवानी और गौरी प्रधान की ओन स्क्रीन जोड़ी को दर्शकों ने बेहद प्यार दिया। इन दोनों आकर्षक कलाकारों का साथ दर्शकों को बेहद अच्छा लग, तो निजी जीवन में भी हितेन और गौरी एक-दूसरे के करीब आने लगें और दोनों के बीच प्यार की मजबूत डोर बंध गयी। जल्द ही हितेन और गौरी ने विवाह का निर्णय लिया। दोनों के जीवन में जुड़वाँ बच्चे उपहार बनकर आये।
गौरी यादव-यश टोंक
'कहीं किसी रोज' में अभिनय के दौरान यश टोंक और गौरी यादव की मुलाकात हुई थी। हालांकि,उस धारावाहिक में गौरी ने यश की भाभी की भूमिका निभायी थी,पर शूटिंग के दौरान दोनों को साथ वक़्त गुजारने के मौके मिलते रहे और उनकी प्रेम कहानी शुरू हो गयी।  यश और गौरी इनदिनों अपनी दो बेटियों के साथ खुशहाल वैवाहिक जीवन बीता रहे हैं।
बरखा बिष्ट-इन्द्रनील सेनगुप्ता
धारावाहिक 'प्यार के दो नाम ..एक राधा और एक श्याम' के सेट पर इन्द्रनील सेनगुप्ता और बरखा बिष्ट एक-दूसरे के साथ काम तो कर रहे थे,पर उन्हें एक-दूसरे के प्रति प्यार का अहसास नहीं था। दोनों एक-दूसरे को लेकर पूर्वाग्रह से ग्रसित थे। ...पर जब धारावाहिक ख़त्म होने लगा तब बरखा और इन्द्रनील को एक-दूसरे की कमी का अहसास होने लगा। दोनों ने आपसी प्यार को महसूस किया। दो वर्ष लबे प्रेम सम्बन्ध के बाद इन्द्रनील और बरखा ने विवाह बंधन में बंधने का फैसला किया। आजकल दोनों अपनी दो वर्षीय बेटी मीरा के साथ ख़ुशी के पल बीता रहे हैं।
सईं देवधर-शक्ति आनंद
'सारा आकाश' की शूटिंग के दौरान सईं देवधर और शक्ति आनंद को एक-दूसरे का साथ अच्छा लगने लगा। लगभग दो वर्षों तक साथ काम करने के बाद दोनों ने महसूस किया कि उन्हें शादी कर लेनी चाहिए। जल्द ही शक्ति और सईं ने विवाह रचा लिया।
श्वेता क्वात्रा-मानव गोहिल
'कहानी घर घर की' शूटिंग के दौरान श्वेता और मानव के बीच  की नींव पड़ी जो बाद में विवाह के परिणाम तक पहुंची। गौरतलब है कि इन दिनों श्वेता और मानव अपनी नन्हीं परी जारा के साथ सुखी वैवाहिक जीवन बीता रहे हैं।
सनाया ईरानी-मोहित सहगल
धारावाहिक 'मिले जब हम तुम' की शूटिंग के दौरान सनाया ईरानी और मोहित सहगल एक-दूसरे के संपर्क में आए। दोनों पहले पहले मित्र,फिर हमराज और अब पति-पत्नी बन गए।
रिद्धि डोंगरा-राकेश
राकेश वशिष्ठ और रिद्धि डोंगरा के बीच प्यार का अंकुर धारावाहिक 'मर्यादा' की शूटिंग के दौरान फूटा। राकेश को रिद्धि की सादगी पसंद आई,तो रिद्धि को राकेश का अपनापन भा गया। 'मर्यादा' में विवाहित जोड़े की भूमिका निभाने के दौरान राकेश और रिद्धि को अहसास हुआ कि निजी जीवन में भी उन्हें विवाह रचा लेना चाहिए। दोनों ने जल्द ही अपने दिल की बात सुनी और 'मर्यादा' की शूटिंग से कुछ समय का ब्रेक लेकर विवाह कर लिया।
बॉक्स के लिए-
और भी विवाहित जोड़े हैं जिनकी प्रेम कहानी 'फिल्मों के सेट' से शुरू हुई-
*दिलीप कुमार-सायरा बानो
*सुनील दत्त-नरगिस
*देव आनंद-कल्पना कार्तिक
*रणधीर कपूर-बबीता
*कुणाल केमु-सोहा अली खान
*बिपाशा बसु-करण सिंह ग्रोवर
और भी विवाहित जोड़े हैं जिनकी प्रेम कहानी 'सीरियल के सेट' से शुरू हुई-
*दिव्यांका त्रिपाठी-विवेक दाहिया
*रवि दुबे-शरगुन मेहता
*किरण कर्माकार-रिंकू धवन
*गुरदीप कोहली-अर्जुन पुंज
*संजीव सेठ-लता सबरवाल
*मजहर सैयद-मौली गांगुली
*आदित्य रेडिज-नताशा शर्मा
*मोहित मालिक-अदिति मालिक

Saturday, February 4, 2017

रचनात्मक स्वतंत्रता पर पहरा

-सौम्या अपराजिता
फ़िल्में रचनात्मक अभिव्यक्ति का भव्य और आकर्षक माध्यम है...,मगर कई बार फ़िल्मकार को रचनाशीलता के लिए मुसीबत भी झेलनी पड़ती है। दरअसल,फ़िल्मकार जब फिल्मों के लिए कहानियां ढूंढते हैं,तो अक्सर उनकी नजर गौरवशाली इतिहास पर पड़ती है और वे इतिहास के पन्नों में दर्ज कई ऐसी कहानी निकाल लेते हैं...जो रोचक और रोमांचक होती है।...मगर जब फिल्मकार ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की कहानी को कहने के लिए रचनात्मक स्वतंत्रता लेते हैं,तो अक्सर उनका सामना विरोध से होता है। हाल ही में संजय लीला भंसाली को 'पद्मावती' की शूटिंग के दौरान भी ऐसे ही विरोध से दो-चार होना पड़ा।
जयपुर में 'पद्मावती' की शूटिंग के समय राजपूत समुदाय के एक संगठन के लोगों ने संजय लीला भंसाली के साथ अभद्रता की और जयगढ़ किले में फिल्म के सेट पर तोड़फोड़ करके शूटिंग भी रोक दी। इन लोगों का आरोप था कि भंसाली अपनी फिल्म में अलाउद्दीन खिलजी और रानी पद्मावती के बारे में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं। दरअसल,इससे पहले भी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बनी फिल्मों को विवादों का सामना करना पड़ा है।
'बाजीराव मस्‍तानी' की शूटिंग के समय भी संजय लीला भंसाली को विरोध का सामना करना पड़ा था। परिणामस्वरूप 'बाजीराव मस्‍तानी' के रिलीज के समय पुणे में जमकर विरोध हुआ था। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस को लिखे एक पत्र में पेशवा के वंशज प्रसादराव पेशवा ने सरकार से इस मामले में दखल देने की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था- 'यह पाया गया है कि रचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर इस फिल्म में मूल इतिहास को उलटा गया है। साथ ही, एक गीत को बाजीराव पेशवा प्रथम की दो पत्नियों काशीबाई और मस्तानी पर फिल्माया गया है। यह घटना ऐतिहासिक तथ्यों से मेल नहीं खाती।' आशुतोष गवोरिकर की फिल्‍म 'जोधा अकबर' का भी राजस्‍थान में जबरदस्त विरोध हुआ था।
राजपूत संगठनों का कहना था कि फ़िल्म में  प्रस्तुति इतिहास में वर्णित तथ्यों के ख़िलाफ़ है। जबकि फ़िल्म के निर्माता-निर्देशक आशुतोष गोवारीकर कह चुके थे कि फ़िल्म में काल्पनिकता का पुट है और यह कोई ऐतिहासिक दस्तावेज़ नहीं है। फिर भी...राजपूतों की करणी सेना ने फ़िल्म के विरोध में बाक़ायदा प्रदर्शन किया था और चेतावनी दी थी कि अगर इसे सिनेमाघरों में रिलीज़ किया गया तो गंभीर नतीजे होंगे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की फ़िल्में ही नहीं,बल्कि दूसरे विषय और कथ्य की फिल्में भी विरोध का शिकार हुई हैं और हो रही हैं। मथुरा में अक्षय कुमार की 'टॉयलेट एक प्रेम कथा' की शूटिंग के दौरान भी जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा।  फिल्म के कथानक को लेकर विरोध उपजा। दरअसल, नंदगांव-बरसाना के बीच फिल्म में वैवाहिक संबंधों को दर्शाने पर क्षेत्र के लोगों को ऐतराज था। वहां के लोगों के अनुसार, नंदगांव के लड़के और बरसाना की लड़की के बीच विवाह सनातन धर्म की परंपराओं और मर्यादाओं के विपरीत है। फिल्म का शीर्षक भी ब्रज संस्कृति के अनुरूप नहीं है। गौरतलब है कि विरोध में पंचायत द्वारा फ़िल्म के निर्देशक की जीभ काटने और अभिनेता अक्षय कुमार को पीटने का आदेश भी जारी किया गया।
एक और फ़िल्म है-'गैंग ऑफ़ वासेपुर 3' जिसे लेकर विरोध का स्वर मुखर हो चुका है। अभी इस फ़िल्म की शूटिंग भी शुरू नहीं हुई है,मगर विरोध शुरू हो चुका है। झारखंड के वासेपुर के निवासी इस आने वाली फिल्म के खिलाफ है। जिसकी वजह है उनके इलाके की बदनामी।  उन्हें लगता है कि इस शहर की सकारात्मक बाते पहली दो कड़ियों में नहीं दिखाई गयी है। इससे उनका इलाका बदनाम हुआ हैं।
दरअसल,फिल्मों के कथ्य से अपात्ति हो सकती है,मगर उसे लेकर हिंसात्मक विरोध का कोई आधार नहीं है। जयपुर में 'पद्मावती' की शूटिंग के समय संजय लीला भंसाली के साथ हुआ दुर्व्यवहार निश्चित रूप से निंदनीय है। कलात्मक अभिव्यक्ति पर ऐसे आघात के प्रति ठोस कदम उठाने चाहिए। यह नहीं भूलना चाहिए कि जब इतिहास के मशहूर पात्रों को फ़िल्मकार अपनी रचनाशीलता से गढ़ते हैं,तभी 'मुग़ले आज़म','जोधा अकबर' और 'बाजीराव मस्तानी' जैसी यादगार और शानदार फ़िल्में अस्तित्व में आती हैं।

Friday, February 3, 2017

बायोग्राफी की बेबाक बातें

-सौम्या अपराजिता
हमारी फिल्मों की ही तरह फ़िल्मी शख्सियत की बायोग्राफी भी मसालेदार होती है। दोस्ती-दुश्मनी के कई राज खोलने वाली बायोग्राफी में रहस्य और रोमांच का सारा सामान मौजूद रहता है। पिछले दिनों ऐसी ही दो नयी बायोग्राफी बाज़ार में आई है जिसमें एक करण जौहर और दूसरी ऋषि कपूर की है। फिल्मों में रची-बसी इन दोनों ही लोकप्रिय और रोचक शख्सियतों की बायोग्राफी ने फिल्मों की चमकीली दुनिया के कई राज खोले हैं।
करण जौहर की फिल्मों की ही तरह उनकी बायोग्राफी भी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। काजोल से उनकी दोस्ती की टूटने की वजह के जिक्र ने करण की बायोग्राफी 'द अनसूटेबल ब्वॉय' को 'टॉक ऑफ़ द टाउन' बना दिया है। करण ने पुस्तक में लिखा है,' काजोल से कोई रिश्ता अब नहीं रह गया है। हमारे बीच में कई गलतफहमी हुई थीं। मुझे तो बहुत ही बुरा लगा था । मैं उस बारे में बात भी नहीं करना चाहूंगा। इसकी वजह है कि यह मेरे और काजोल के लिए सही भी नहीं रहेगा। हम करीब 20 साल बाद बातचीत नहीं करेंगे। हम अब एक दूसरे को देखकर बस हेलो कहते हैं और आगे बढ़ जाते हैं।' काजोल के साथ विवाद के अतिरिक्त करण ने अपने निजी रिश्तों और प्रेम संबंधों को लेकर भी कई खुलासे किए हैं। इस चर्चित पुस्तक में करण ने अपने वात्सल्य प्रेम का भी जिक्र किया है और लिखा है,' मेरी एक ख्वाहिश है कि वे जीवन शादी करें या न करें लेकिन मुझे एक बच्चा जरूर होगा। मेरे अंदर एक अच्छी मां के सारे गुण विद्यमान है और मैं बच्चों की देखभाल को लेकर बहुत एक्टिव हूं।'
करण जौहर की बायोग्राफी के साथ-साथ ऋषि कपूर की बायोग्राफी भी खूब सुर्खियां बटोर रही है। दरअसल,ऋषि कपूर ने अपनी बायोग्राफी 'खुल्लम-खुल्ला- ऋषि कपूर अनसेंसर्ड' में कई चौंकाने वाले खुलासे किये हैं जिसमे से सबसे चकित करने वाला वाकया है -दाऊद इब्राहिम के साथ चाय पीने का जिक्र। रोचक शीर्षक वाली अपनी बायोग्राफी में ऋषि ने 'कर्ज' के असफल होने से उन्हें हुए डिप्रेशन का भी खुलासा किया है। उन्होंने लिखा है, 'कर्ज' से उन्हें बहुत उम्मीदें थी।मुझे लगा था कि 'कर्ज' से मेरा करियर बुलंदी छूने लगेगा।इसमें बेहतरीन संगीत और कलाकार थे।लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ,तो मैं गहरे डिप्रेशन में चला गया। मैं कैमरे के सामने जाने से भी डरने लगा था।'
इससे पहले पत्नी नंदिता पुरी द्वारा लिखी गयी ओमपुरी की बायोग्राफी ने भी काफी बवाल मचाया था। दरअसल,'ओमपुरी-अनलाइकली हीरो' के अवलोकन के पूर्व ऐसी चर्चा थी कि इसमें ओमपुरी के कई महिलाओं के साथ शारीरिक संबंध का जिक्र है जिसे लेकर ओमपुरी नाराज थे और उन्होंने नंदिता को बुरा-भला कहते हुए यह धमकी तक दे डाली थी कि वह किसी भी कीमत पर इस किताब को छपने नहीं देंगे। जैसे-जैसे समय बीता यह बात साफ हो गई कि यह प्रचार पाने के लिए की गई सोची-समझी रणनीति थी। जब पुस्तक छपकर सामने आई तो सारी बातें साफ हो गई थीं।नंदिता पुरी ने इस किताब में अपने पति के जीवन के उन पहलुओं को सामने लाने की कोशिश की है जो अब तक आम लोगों के सामने नहीं आ पाए थे।
चिरयुवा और सदाबहार रेखा की बायोग्राफी 'रेखा: द अनटोल्ड स्टोरी' भी अपने कथ्य के कारण पाठकों की जिज्ञासा का विषय बनी हुई है। इस पुस्तक में रेखा के जीवन के कई राज़ खोले गए हैं। हालांकि, इसके पहले भी रेखा को लेकर कई बातें कही जा चुकी हैं,लेकिन कम ही लोग जानते होंगे कि रेखा के जन्म तक उनके माता-पिता ने शादी नहीं की थी। इसके साथ ही बगैर शादी के सिंदूर और शूटिंग के सेट पर रेखा को किए गए चुम्बन सहित कई अन्य चौकाने वाले किस्सों का जिक्र है। शत्रुघ्न सिन्हा ने भी बायोग्राफी 'एनीथिंग बट खामोश' में कई रोचक तथ्यों से परिचित कराया है। उन्होंने बताया है कि अमिताभ बच्चन उनकी शोहरत से परेशान थे। अमिताभ अपनी कुछ फिल्‍मों में उन्‍हें नहीं देखना चाहते थे। जीनत अमान और रेखा की वजह से उनके और अमिताभ बच्‍चन के बीच दरार बढ़ी। दरअसल,रेखा और शत्रुघ्न सिन्हा की बायोग्राफी में अमिताभ बच्चन से जुड़े वाकयों का उल्लेख रोचक बनाता है।
हिंदी फिल्मों के अभिनय सम्राट दिलीप कुमार और सदाबहार देव आनंद के जीवन के अनछुए पहलू भी पुस्तक में उकेरे गए हैं। जहां
दिलीप कुमार के जीवन की बानगी को 'सब्सटेंस एंड द शैडो' में लेखक उदय तारा नायर ने दिलीप कुमार से बातचीत और इंटरव्यू के आधार पर लिखा है...वहीँ देव आनंद ने स्वयं ही ऑटो बायोग्राफी ' रोमांसिंग विद लाइफ-एन ऑटोबायोग्राफी' लिखी। 'रोमांसिंग विद लाइफ-एन ऑटोबायोग्राफी' के बहाने पाठक देव आनंद की रूमानी छवि और उनकी फिल्मी जिंदगी की चाशनी में डूब जाते हैं। रोचक तथ्य है कि पुस्तक में देव आनंद ने फिल्मी हस्तियों के अलावा राजनीतिक हस्तियों का भी जिक्र किया है। खास तौर से इंदिरा गांधी और उनके पुत्र संजय गांधी का। इंदिरा गांधी के बार में देव आनंद ने लिखा है कि वह बहुत ही कम बोलती थीं, जिसकी वजह से उनके विरोधी इंदिरा गांधी को गूंगी गुड़िया कहते थे।
लोकप्रिय और सफल कलाकारों की बायोग्राफी के बीच 'आशिकी' की गुमशुदा अभिनेत्री अनु अग्रवाल की बायोग्राफी का जिक्र भी उल्लेखनीय है। अनु ने अपनी आत्‍मकथा 'अनयूजवल: मेमोइर ऑफ़ ए गर्ल हू केम बैक फ्रॉम डेड' में अपने उथल-पुथल भरे जीवन की मार्मिक मगर रोचक कहानी बयां की है। अनु के अनुसार,'यह उस लड़की की कहानी है जिसकी ज़िंदगी कई टुकड़ों में बंट गई थी और बाद में उसने खुद ही उन टुकड़ों को एक कहानी की तरह जोड़ा है।'
दरअसल,फ़िल्मी सितारों के निजी जीवन से जुड़ी जिज्ञासा इन बायोग्राफी के प्रति पाठकों की उत्सुकता बढ़ाती है। साथ ही,फ़िल्मी कलाकारों के जीवन में रिश्तों के बनते-बिगड़ते समीकरण का उल्लेख भी बायोग्राफी को लोकप्रिय बनाता है। उम्मीद है फिल्मों से जुड़े और भी कलाकार अपने रोचक जीवन की बानगी पुस्तक में पेश करते रहेंगे। हालांकि... यदि उनमे मसालेदार घटनाओं के मुकाबले प्रेरक प्रसंगों को प्राथमिकता मिले,तो और भी अच्छा होगा।
फ़िल्मी शख्सियतों की प्रकाशित उल्लेखनीय बायोग्राफी-
*देव आनंद-'रोमांसिंग विद लाइफ'
*दिलीप कुमार-'द सब्सटैंस एंड द शैडो'
*प्रेम चोपड़ा-'प्रेम नाम है मेरा,प्रेम चोपड़ा'
*नसीरुद्दीन शाह-'एंड देन वन डे:द मेमॉयर'
*जावेद अख्तर-'तरकश'
*वैजयंती माला-'..बॉन्डिंग:द मेमॉयर'
*रेखा-'रेखा:द अनटोल्ड स्टोरी'
*शत्रुघ्न सिन्हा-'एनीथिंग बट खामोश'
करीना कपूर-'द स्टाइल डायरी ऑफ़ अ बॉलीवुड दिवा'
अनु अग्रवाल:'अनयुजुअल:मेमॉयर ऑफ़ अ गर्ल हु कम बैक फ्रॉम द डेड'
ममता कुलकर्णी-'ऑटोबायोग्राफी ऑफ़ अ योगिनी'
आयुष्मान खुराना-क्रेकिंग द कोड:माय जर्नी इन द बॉलीवुड

Tuesday, January 24, 2017

सीरियल से सिनेमा तक...

-सौम्या अपराजिता
पिछले दिनों विद्या बालन की एक ऐसी तस्वीर सामने आयी जिसने उन दिनों की याद दिला दी जब विद्या धारावाहिक 'हम पांच' में राधिका की भूमिका निभाया करती थी। दरअसल,एक आयोजन के दौरान विद्या की मुलाकात 'हम पांच' के कलाकारों से हुई,तो उन्होंने गर्व के साथ अपने पुराने साथी कलाकारों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं और उसे सोशल मिडिया पर शेयर की। उल्लेखनीय है कि विद्या उन चुनींदा कलाकारों में से एक हैं जिन्होंने स्मॉल स्क्रीन से सिल्वर स्क्रीन तक का सफ़र सफलता पूर्वक तय किया है। विद्या से पहले शाहरुख़ खान और इरफ़ान खान ने स्मॉल स्क्रीन से सिल्वर स्क्रीन का सफ़र तय किया और बता दिया कि अगर हुनर और हौसला हो,तो छोटे पर्दे से बड़े पर्दे तक के सफ़र को उपलब्धियों भरा बनाया जा सकता है। हालांकि...छोटे पर्दे से बड़े पर्दे तक का सफ़र इतना आसान नहीं है। कुछ ही कलाकार हैं जिन्होंने शाहरुख़ खान,इरफ़ान खान,मनोज बाजपेयी,आर माधवन और विद्या बालन की तरह अपनी मेहनत,लगन और धैर्य से छोटे पर्दे से बड़े पर्दे तक का सफ़र सफलतापूर्वक तय किया है।
यदि मौजूदा दौर की बात करें,तो आयुष्मान खुराना,सुशांत सिंह राजपूत और यामी गौतम ने यह साबित कर दिया है कि छोटे पर्दे का अनुभव बड़े पर्दे के सफ़र को शानदार बना सकता है। ये तीनों ही कलाकार कभी टेलीविज़न स्क्रीन पर अपने अभिनय के रंग भरते थे और आज ये बिग स्क्रीन के लोकप्रिय चेहरे बन गए हैं। यामी गौतम और आयुष्मान खुराना ने साथ-साथ छोटे पर्दे से बड़े पर्दे का रुख किया। अगर कहें कि 'विक्की डोनर' की रिलीज़ के बाद इडियट बॉक्स के दो चेहरे सिल्वर स्क्रीन पर चमक उठे,तो गलत नहीं होगा।। रियलिटी शो 'रोडीज' से उभरने वाले आयुष्मान खुराना और 'ये प्यार न होगा कम' में अपनी सहज अदायगी से मन मोहने वाली यामी गौतम ने बेहद कम वक़्त में फ़िल्म प्रेमियों के दिल में जगह बना ली है। आयुष्मान जहाँ हरफनमौला कलाकार के रूप में अपनी पहचान बनाने में कामयाब हुए हैं,वहीँ यामी ने अपने आकर्षण और अभिनय से बड़े निर्माता-निर्देशकों का ध्यानाकर्षण किया है। आयुष्मान इस समय 'बरेली की बर्फी' और 'मेरी प्यारी बिंदु' जैसी चर्चित फिल्मों में अभिनय कर रहे हैं,तो यामी के पास दो बड़ी फ़िल्में 'काबिल' और 'सरकार 3' है।
'एम एस धोनी' की सफलता के बाद सुशांत सिंह राजपूत के लिए बड़े पर्दे का सफ़र और भी सुहाना हो गया है। पिछले दिनों उन्हें 'सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के स्टार स्क्रीन अवार्ड से भी नवाजा गया। सुशांत के लिए अच्छी बात है कि  उनकी पहली फिल्म 'काय पो छे' बॉक्स ऑफिस पर सफल साबित हुई थी। दरअसल,सुशांत जब धारावाहिक 'पवित्र रिश्ता' के मानव से 'काय पो छे' के ईशान भट्ट बने,तो उनके लिए दर्शकों का प्यार-दुलार और भी बढ़ गया। सुशांत कहते हैं,'मैं वहां (टीवी पर) एक ही जैसा रोल करके बोर हो गया था, तभी मैंने टीवी छोड़कर कुछ टाइम असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया और फिर फिल्म में काम करना शुरू किया।' सुशांत को सिर्फ दर्शकों से ही नहीं बल्कि हिंदी फिल्मों के प्रतिष्ठित निर्माता-निर्देशकों की भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।
छोटे पर्दे से बड़े पर्दे की ओर रुख करने वाले कलाकारों में राजीव खंडेलवाल,प्राची देसाई और ग्रेसी सिंह भी उल्लेखनीय हैं। धारावाहिक 'कहीं तो होगा' में धीर-गंभीर सुजल की भूमिका से दर्शकों के दिल में बसने वाले राजीव ने राजकुमार गुप्ता निर्देशित फिल्म 'आमिर' से सिल्वर स्क्रीन पर कदम रखा। दर्शकों ने उन्हें बड़े पर्दे पर भी स्वीकारा। हालांकि,राजीव को स्टार स्टेटस नहीं मिला है,फिर भी वे निर्माता-निर्देशक और  दर्शकों के चहेते बने हुए हैं। राजीव की ही तरह प्राची देसाई भी हिंदी फिल्मों में अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब हुई हैं। 'कसम से' में बानी की लोकप्रिय भूमिका निभाने के बाद जब वे 'रॉक ऑन' में फरहान अख्तर की नायिका बनीं, तो दर्शकों ने प्राची में अच्छी अभिनेत्री की झलक देखी और निर्माता-निर्देशक भी इस मासूम सी दिखने वाली लड़की में अपनी फिल्म की नायिका की छवि देखने लगे। परिणामस्वरूप प्राची को रोहित शेट्टी और मिलन लुथरिया जैसे दिग्गज निर्देशकों के साथ अभिनय का मौका मिला। ग्रेसी सिंह ने धारावाहिकों से फिल्मों की दुनिया में बड़ी छलांग लगाते हुए पहली ही फ़िल्म 'लगान' में आमिर खान की नायिका बनीं। हालांकि,उसके बाद ग्रेसी का फ़िल्मी करियर रंग नहीं ला पाया।
टीवी स्क्रीन से निकलकर बिग स्क्रीन को रोशन करने वाले कलाकारों में हंसिका मोटवानी भी एक हैं। हालांकि,हंसिका ने हिंदी फिल्मों में नहीं,मगर साउथ की फिल्मों में अपनी स्थायी पहचान बना ली है। वे तमिल-तेलुगु फिल्मों की बड़ी अभिनेत्री बन चुकी हैं। जहाँ हंसिका ने अपने फ़िल्मी करियर के लिए साउथ की राह पकड़ी,वहीँ करण सिंह ग्रोवर,गुरमीत चौधरी,जय भानुशाली और पुलकित सम्राट जैसे युवा कलाकारों ने धारावाहिकों के बाद हिंदी फिल्मों को करियर के लिए चुना। हालांकि...गुरमीत,करण,जय और पुलकित अभी भी संघर्षरत अभिनेताओं में शुमार हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पहचान तो बना ली है,मगर वे स्थायी पहचान बनाने में असफल रहे हैं।
दरअसल,अभिनय के सफ़र में तरक्की पाने के लिए टीवी की दुनिया से फिल्मों की ओर रुख करने वाले कलाकारों के पास अनुभव और हुनर तो होता है,मगर हर बार किस्मत उनका साथ नहीं देती। कई बार तो अच्छे अवसर की कमी उनके लिए मुसीबत का सबब बन जाती है और प्रतिभा के बाद भी उन्हें फिल्मों में स्थायी पहचान नहीं मिल पाती है। हालांकि, अब टीवी और फिल्मों  विभाजक रेखा समाप्त हो चुकी है। छोटे पर्दे पर बड़े पर्दे के सितारों की लगातार मौजूदगी ने इस दूरी को मिटाने का काम किया है। अब दर्शक अपने पसंदीदा कालकारों को हर अवतार में स्वीकार करने को तैयार है। इस स्थिति ने टीवी के कालकारों के लिए एक नयी उम्मीद जगा दी है।
बॉक्स के लिए-
टीवी से जुड़े रहना चाहते हैं शाहरुख़..
' मुझे यह समझ आया है कि टीवी की पहुंच अब लोगों के दिलों तक पहले से कहीं ज्यादा हो गई है। इसलिए टीवी सीरीज में भी अब ऐसी कहानियां देखने को मिल रही हैं जिससे ऑडियंस खुद को जोड़ सके।बेशक मैं फिर से टीवी की दुनिया में आना चाहूंगा क्योंकि कुछ कहानियां केवल दो घंटे के समय में नहीं बताई जा सकती। इसके लिए आपको दस घंटे चाहिए होते हैं।
टीवी से फिल्मों की ओर रुख क्यों करते हैं कलाकार-
फिल्मों में पैसा ज्यादा-तनाज़ ईरानी
टीवी में आपके किरदार को कभी भी इन-आउट किया जा सकता है, लेकिन फिल्मों में आपको एक किरदार को पूरी तरह जीने का मौका मिलता है। इसके अलावा बॉलिवुड में टीवी के मुकाबले पैसा भी ज्यादा मिलता है।
टीवी की दुनिया में अफरातफरी-रोनित रॉय
टीवी की दुनिया में अफरातफरी का माहौल रहता है। हालांकि, फिल्मों में भी लोग ज्यादा रिलैक्स नहीं हैं, लेकिन सीरियल्स के मुकाबले स्थिति वहां फिर भी ठीक है।
टीवी से फिल्मों में जाना तरक्की-मनोज बोहरा
छोटे पर्दे से बड़े पर्दे पर जाना एक बहुत बड़ा कदम है। यह एक एक्टर के रूप में आपकी तरक्की को दर्शाता है। भले ही सीरियल में आप कितने भी पॉपुलर हो जाएं, लेकिन फिल्मों में काम करने से अलग ही पहचान बनती है। फिल्मों में आपके द्वारा निभाए गए किरदारों को लंबे वक्त तक याद रखा जाता है।
▶ Show quoted text

नए कलेवर में पुरानी हिंदी फ़िल्में

-सौम्या अपराजिता
कहते हैं ... 'ओल्ड इज़ गोल्ड'। इसी कहावत को ध्यान में रखते हुए हिंदी फिल्मों के निर्माता अक्सर पुरानी-क्लासिक फिल्मों के रीमेक बनाकर उन्हें नए रंग-रूप में नयी पीढ़ी के दर्शकों के सामने प्रस्तुत करने की कोशिश करते रहे हैं। अग्निपथ,डॉन,ख़ूबसूरत,जंजीर और चश्मेबद्दूर जैसी सदाबहार फिल्मों के सफल रीमेक दर्शक देख चुके हैं। आने वाले दिनों में कुछ और रोचक पुरानी फिल्मों की रीमेक नए रंग-रूप में दर्शकों के सामने होंगी।
इत्तेफ़ाक
वर्ष 1969 में प्रदर्शित हुई थ्रिलर 'इत्तेफ़ाक' नए कलाकारों के साथ नए कलेवर में दर्शकों के सामने होगी। राजेश खन्ना और नंदा अभिनीत इस फ़िल्म के रीमेक में सिद्धार्थ मल्होत्रा और सोनाक्षी सिन्हा मुख्य भूमिका में होंगी। रवि चोपड़ा के बेटे अभय चोपड़ा 'इत्तेफ़ाक' के रीमेक से निर्देशन में अपना सफ़र की शुरुआत करेंगे। धर्मा प्रोडक्शन निर्मित इस फ़िल्म की शूटिंग फरवरी शुरू होगी। उत्साहित सिद्धार्थ कहते हैं,'
मैं 'इत्तेफाक' को लेकर बहुत एक्साइटेड हूं। यह 1969 में आई फिल्म कर रीमेक है। मेरे लिए एक बेंचमार्क पहले ही तय हो गया है, क्योंकि 1960 के दशक में आई फिल्म में सुपरस्टार राजेश खन्ना थे। रीमेक में मुझे खुद को उनके अभिनय कौशल के अनुरूप ढालना होगा।'
जुड़वा
पिछले दिनों वरुण धवन ने सलमान खान अभिनीत 'जुड़वा' के रीमेक 'जुड़वा 2' की औपचारिक घोषणा की। वरुण इस फ़िल्म में सलमान खान वाली दोहरी भूमिका निभाएंगे जबकि उनका साथ देंगी जैकलीन फ़र्नांडीज और तापसी पन्नू। बता दें कि 'जुड़वा' में सलमान खान के साथ करिश्मा कपूर और रंभा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। रोचक तथ्य है कि 'जुड़वा' के निर्देशक डेविड धवन 'जुड़वा 2' में अपने पुत्र वरुण धवन को निर्देशित करेंगे। वरुण कहते हैं,'हर फिल्म में हम अपना बेहतर देने की कोशिश करते हैं। यह फिल्म मुझे एक बड़ी जिम्मेदारी का अहसास करा रही है। जिसकी यह है कि एक तो यह सलमान खान की फिल्म का रीमेक है और दूसरे इस फिल्म के डायरेक्टर की अपेक्षाएं। हालांकि जिम्मेदारी के साथ ही मैं इस फिल्म को लेकर उत्सुक भी हूं।'
सदमा
1983 में अभिनेता कमल हासन-श्रीदेवी की फिल्म 'सदमा' का रीमेक बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ऐड फिल्ममेकर लॉयड बपतिस्ता इसका निर्माण कर रहे हैं। वे बताते हैं,'मैं सदमा का रीमेक निर्मित कर रहा हूं। यह एक शानदार फिल्म है। जब मैं युवा था तब मैंने यह फिल्म देखी थी और अंतिम दृश्य हमेशा मेरे दिमाग में बना रहता है। मुझे लगता है कि आजकल की पीढ़ी के जो लोग प्यार में विश्वास नहीं रखते हैं उन्हें 'सदमा' जैसी फिल्में अवश्य रूप से देखनी चाहिए।' फ़िल्म की कास्टिंग और अन्य पहलुओं पर महत्वपूर्ण निर्णय जल्द ही होंगे। हालांकि...ख़बरों के मुताबिक करीना कपूर या आलिया भट्ट 'सदमा' की रीमेक में केंद्रीय भूमिका निभाती हुई नजर आ सकती हैं।
चमेली की शादी
वर्ष1986 में आई कॉमेडी फिल्म 'चमेली की शादी' की रीमेक बनने वाली है और खबरों के मुताबिक लीड रोल के लिए पहले निर्माता विनय सप्रू और राधिका राव ने सोनाक्षी सिन्हा को अप्रोच किया गया था,मगर किसी वजह से बात नहीं बन पायी और अब 'चमेली की शादी' का रीमेक फैंटम फिल्म्स के बैनर तले बनने की बात कही जा रही है। फ़िल्म में परिणीति चोपड़ा और दिलजीत दोसांझ के होने की चर्चा है। 'चमेली की शादी' की रीमेक में जहां परिणीति चोपड़ा को  अमृता सिंह की भूमिका निभाने की जिम्मेदारी मिलेगी,वहीँ अनिल कपूर के भोलेपन को दलजीत पर्दे पर उतारेंगे। रोहित जुगराज को इस फ़िल्म के निर्देशन की जिम्मेदारी सौंपी गयी है।
मिस्टर इंडिया
अपने बेटे के कैरियर को स्थापित करने के लिए अनिल कपूर  ने 'मिस्टर इंडिया' के रीमेक की योजना बनायी है। ख़बरों के अनुसार बोनी कपूर निर्मित इस फ़िल्म में अनिल कपूर के पुत्र हर्षवर्धन कपूर केंद्रीय भूमिका निभाएंगे जबकि अनिल उनके पिता के किरदार में नजर आएंगे। हालांकि,अभी इस फ़िल्म की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है,मगर निश्चित रूप से पापा द्वारा निभायी गयी भूमिका में पुत्र को देखना रोचक होगा।
धड़कन
वर्ष 2000 की सुपरहिट फिल्म 'धड़कन' की रीमेक बनाने की तैयारियां हो रही हैं। पहले बताया जा रहा था कि शिल्पा शेट्टी,सुनील शेट्टी और अक्षय कुमार अभिनीत 'धड़कन' की इस रीमेक फ़िल्म की हीरोइन श्रद्धा कपूर, जबकि हीरो सूरज पंचोली और फवाद खान होंगे।...मगर अब खबर है की प्रेम सोनी निर्देशित 'धड़कन' की रीमेक में नए कलाकार होंगे। सूत्रों की मानें बतो फिल्‍म की शूटिंग जल्‍द शुरू हो सकती है क्‍योंकि निर्माता अब अधिक देर नहीं करना चाहते हैं।
प्रदर्शित हो चुकी पुरानी हिंदी फिल्मों की रीमेक:
अग्निपथ
डॉन
जंजीर
राम गोपाल वर्मा की आग ('शोले' की रीमेक)
खूबसूरत
चश्मेबद्दूर
बोल बच्चन ('गोलमाल' की रीमेक)

इंडियावालों की धूम

-सौम्या अपराजिता
इंडिया तरक्की कर रहा है। परम्परा और आधुनिकता के तालमेल से बने इंडियावाले दुनिया में अपनी प्रतिभा और आकर्षण का जादू चला रहे हैं। विशेषकर ग्लैमर वर्ल्ड से जुड़े इंडिया वालों का आकर्षण पाश्चात्य देशों में खूब चल रहा है। वे विश्व स्तर पर खुद को साबित कर रहे हैं...।
गर्व की बात है कि संयुक्त राष्ट्र संघ की यूनिसेफ़ ने प्रियंका चोपड़ा को अपने ग्लोबल गुडविल एम्बेसडर के रूप में चुना है। प्रियंका के लिए ही नहीं,बल्कि इंडियावालों के लिए भी यह किसी उपलब्धि से कम नहीं है। अमेरिकन टीवी शो 'क्वांटिको' में केंद्रीय भूमिका निभा रही प्रियंका कहती हैं कि वह यूनीसेफ की ग्लोबल गुडविल एम्बेसडर बनकर बेहद खुश और सम्मानित महसूस कर रही हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले प्रियंका यूनीसेफ की नेशनल गुडविल एम्बेसडर रह चुकी हैं। प्रियंका ने पिछले दिनों ट्वीट कर कहा, 'विश्वास नहीं होता कि 10 साल हो गए! अब सभी बच्चों के लिए इस अद्भुत संगठन के साथ ग्लोबल गुडविल एम्बेसडर के रूप में सेवा का अवसर मिलना मेरे लिए सम्मान की बात है।' एक तरफ प्रियंका यूनीसेफ की ग्लोबल गुडविल एम्बेसडर बनती हैं,तो दूसरी तरफ अपने स्टाइल से ऑस्कर रेड कार्पेट पर धूम भी मचाती हैं। दरअसल, 'ऑस्कर अवॉर्ड समारोह' में हॉलीवुड की तमाम बड़ी हस्तियों के साथ-साथ प्रियंका ने भी शिरकत की थी। ऑस्कर में शिरकत करने वाली अभिनेत्रियों के परिधान हमेशा से ही चर्चा का विषय रही है और इस मामले में प्रियंका अपनी पहली उपस्थिति में ही बाजी मारने में कामयाब रहीं। ऑस्कर समारोह के दौरान जिन अभिनेत्रियों के परिधान को गूगल पर सबसे ज्यादा सर्च किया गया, उनमें प्रियंका भी शीर्ष दस में जगह बनाने में कामयाब रहीं। प्रियंका इस सूची में सातवें स्थान पर रहीं। इस सूची में पहली पोजिशन पर हॉलिवुड ऐक्ट्रेस जेनिफर गार्नर रहीं, वहीं प्रियंका ने केट ब्लेंशेट, केट विंसलेट और ओलिविया वाइल्ड जैसी हॉलिवुड की मशहूर अभिनेत्रियों को पछाड़ते हुए इस सूची में सातवां मुकाम हासिल किया।
रितिक रोशन के दीवाने पूरी दुनिया में हैं इसका पता इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक ऑनलाइन सर्वे में उन्हें दुनिया के सबसे हैंडसम पुरुषों की सूची में तीसरा पायदान मिला है। वर्ल्डटॉपमोस्ट डॉट कॉम साइट ने यह सर्वे कराया है। इस सूची में हॉलीवुड के अभिनेता टॉम क्रूज और रॉबर्ट पेटिसन के बाद रितिक को तीसरा स्थान मिला। रितिक रोशन के अलावा इस सूची में ह्यूज जैकमैन, जॉनी डेप और ब्रैट पिट को भी शामिल किया गया है। सलमान खान को इस सूची में सातवां स्थान मिला है। इस उपलब्धि के बारे में रितिक कहते हैं,'यह मेरे लिए एक कॉम्प्लीमेंट है, अचीवमेंट नहीं। अपने प्रशंसकों के प्यार के लिए मैं आभारी हूं और इस कॉम्प्लीमेंट के लिए उन्हें धन्यवाद करता हूं। मेरे ख्याल से किसी भी सर्वे में दुनिया के टॉप-10 में जगह बनाना ही महत्वपूर्ण है। मेरा मानना है कि गुड लुक्स कभी भी आपके आंतरिक व्यक्तित्व का हिस्सा नहीं होने चाहिए। जब आप यह न सोचें कि आप बहुत हैंडसम लगते हैं या आप बहुत अट्रैक्टिव हैं, ऐसा न सोचना आपको और अधिक आकर्षक दिखाता है।' गौरतलब है कि रितिक ने एशिया के सबसे सेक्सी पुरुषों की सूची में भी दूसरा स्थान पाया है।
एशिया के सबसे सेक्सी पुरुषों की सूची में रितिक रोशन के साथ कई और इंडियावाले शामिल हैं। स्मॉल स्क्रीन के लोकप्रिय अभिनेता आशीष शर्मा तीसरे स्थान पर हैं जबकि सलमान खान शीर्ष पांच में शामिल हैं। इस सूची में शाहरूख खान सतरहवें स्थान पर हैं। वहीं रणवीर सिंह ने दसवां और शाहिद कपूर ने सातवां स्थान हासिल किया है। 
ब्रिटेन के समाचार पत्र 'ईस्टर्न आई' द्वारा प्रकाशित एशिया की सबसे सेक्सी महिलाओं की सालाना सूची में भी देसी बालाओं ने बाजी मार ली है। इस सूची के अनुसार दीपिका पादुकोण एशिया की सबसे सेक्सी महिला बनी हैं,तो वहीँ दूसरे स्थान पर प्रियंका चोपड़ा हैं। रोचक तथ्य है कि तीसरे स्थान पर स्मॉल स्क्रीन की अभिनेत्री निया शर्मा हैं। एशिया की सबसे सेक्सी महिलाओं की इस सूची में आलिया भट्ट  पांचवें स्थान पर हैं,तो सनाया ईरानी ने छठा स्थान पाया है। सातवे स्थान पर कट्रीना कैफ, सोनम कपूर आठवें और गौहर खान दसवें स्थान पर हैं।
एशिया की सबसे सेक्सी महिला की उपाधि पाकर दीपिका पादुकोण बेहद सम्मानित महसूस कर रही हैं। वे कहती हैं,' इससे मेरे चेहरे पर मुस्कान आई है, लेकिन अलग-अलग लोगों के लिए सेक्सी का मतलब भी अलग होता है।मेरे लिए यह सिर्फ शारीरिक नहीं है।जिसके साथ आप सहज है वहीं सेक्सी है। आत्मविश्वास सेक्सी है। मासूमियत और सौम्यता सेक्सी है।' काबिलेगौर है कि फोर्ब्स मैग्ज़ीन
द्वारा जारी की गयी 'वर्ल्ड हाईएस्ट पेड एक्ट्रेस' की सालाना सूची के 'शीर्ष दस' में भी दीपिका शामिल हैं। एक करोड डॉलर की कमाई के साथ तीस वर्षीय दीपिका इस सूची में दसवें स्थान पर हैं। उल्लेखनीय है कि इस सूची में शामिल की जाने वाली वह एकमात्र भारतीय अभिनेत्री हैं।
इस वर्ष 'फोर्ब्स मैग्ज़ीन' के 'वर्ल्डज़ हाईएस्ट पेड एक्टर्स' की सूची में शीर्ष दस में शाहरुख़ खान और अक्षय कुमार की उपस्थिति उल्लेखनीय है। इसके अनुसार दुनिया भर में सबसे ज्यादा कमाई करने वाले अभिनेताओं में शाहरुख खान आठवें स्थान पर हैं,तो अक्षय कुमार दसवें स्थान पर काबिज हैं। मैग्जीन के मुताबिक आठवें स्थान पर काबिज शाहरुख खान की इस साल की आय 221 करोड़ रुपए(3 करोड़ 30 लाख डॉलर) रही। इसी नंबर पर उनके साथ'आयरन मैन'के डाउनी जूनियर भी इतनी ही कमाई के साथ शामिल हैं। 3.15 करोड़ डॉलर यानी 211 करोड़ रुपए की आय के साथ  अक्षय कुमार हॉलीवुड के ब्रैड पिट के साथ दसवें नंबर पर हैं। फोर्ब्स के मुताबिक अक्षय हिट फिल्मों के चलते कमाई के मामले में आगे हैं। साथ ही विज्ञापनों से भी उनकी अच्छी कमाई होती है। सूची के मुताबिक 2.85 करोड़ डॉलर(190 करोड़ रुपए)की कमाई के साथ सलमान खान चौदहवें नंबर पर हैं,जबकि 2 करोड़ डॉलर(134 करोड़ रुपए)की कमाई के साथ अमिताभ बच्चन को लिस्ट में अठारहवां स्थान दिया गया है। 
बॉक्स के लिए---
* 'गूगल इंडिया' द्वारा जारी किए गए 'टॉप ट्रेंडिंग एक्टर्स' की सूची -
1-सुशांत सिंह राजपूत
2-कबीर बेदी
3-पुलकित सम्राट
4-हर्षवर्धन कपूर
5-सलमान खान
*'गूगल इंडिया' द्वारा जारी किए गए 'टॉप ट्रेंडिंग एक्टर्स' की सूची -
1-दिशा पटानी
2-उर्वशी रौतेला
3-पूजा हेंगड़े
4-मंदाना करीमी
*सोनम-शाहिद बने हॉटेस्ट वेजेटेरियन
पेटा इंडिया ने शाहिद कपूर और सोनम कपूर को इस वर्ष के हॉटेस्ट वेजेटेरियन की उपाधि दी गयी है। पेटा की तरफ से कराए गए एक ऑनलाइन सर्वे के अनुसार सोनम और शाहिद विजेता बनकर उभरे हैं। शाहिद और सोनम ने अमिताभ बच्चन,आलिया भट्ट,कंगना रनौत, विद्युत जामवाल,आर माधवन और सनी लियोनी को पीछे छोड़ यह खिताब अपने नाम किया है

बायोपिक,विवाद और मनोरंजन

-सौम्या अपराजिता
जब फ़िल्मकार अपनी फिल्मों में रियल लाइफ के नायकों के जीवन की कहानी कहने की सोचते हैं
,तो विवादों का साया उनके साथ-साथ चलने लगता है। दरअसल,रियल लाइफ चरित्रों पर आधारित फिल्मों अर्थात 'बायोपिक' और विवादों का चोली-दामन का साथ रहा है। फ़िल्मकार यदि किसी व्यक्ति के निजी जीवन से जुड़े तथ्यों को दिखाने में थोड़ी भी रचनात्मक छूट लेते हैं,उन्हें आलोचना-प्रत्यालोचना का शिकार होना पड़ता है। पिछले दिनों प्रदर्शित हुई 'दंगल' को भी ऐसे विवाद से दो-चार होना पड़ रहा है।
महावीर फोगट के जीवन पर आधारित 'दंगल' सफलता के सोपान छू रही है। सफलता की सीढियां चढ़ रही 'दंगल' प्रदर्शन से पहले विवादों से दूर रही,मगर प्रदर्शन के दो-तीन बाद एक विवाद इस प्रशंसित फ़िल्म से भी जुड़ ही गया। यह विवाद निर्माता-निर्देशकों द्वारा फ़िल्म मेकिंग के दौरान ली गयी रचनात्मक छूट के कारण हुआ। दरअसल,'दंगल' में दिखाया गया है कि जब गीता फोगट रियो ओलंपिक के फाइनल बाउट के लिए रिंग में जा रही होती हैं,तो उनके पिता को किसी बहाने से एक कमरे में बंद कर दिया जाता है। अगले दृश्य में उसके कोच सामने आते हैं। सभी को यही लगता है कि गीता के कोच के कहने पर ऐसा किया गया है। फिल्म देखने के बाद रियल लाइफ में गीता के कोच रहे पीआर सोंधी ने बताया कि सही में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था। फिल्म में जो दिखाया गया है उससे उनकी छवि को धक्का लगा है। उन्होंने यह भी कहा कि आमिर खान को फिल्म बनाते समय संबंधित लोगों से भी बात करनी चाहिए। गीता ने भी इस दृश्य की सत्यता के बारे में अपनी राय रखते हुए अपने कोच की बात को सच बताया है। पिता को कमरे में बंद करने की बात का गीता ने भी खंडन किया है। गीता के अनुसार फिल्म को रोमांचक बनाने के लिए ऐसा किया गया है। जबकि सही में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था। आमिर खान ने भी माना है कि 'दंगल' को रोमांचक और मनोरंजन बनाने के लिए यह रचनात्मक छूट ली गयी थी। आमिर के अनुसार, यह फिल्म(दंगल) एक बायोपिक है लेकिन इसके कुछ पात्रो को इंटरटेनिंग बनाने के लिए बदला गया है। यह केवल दर्शको के मनोरंजन के लिए किया गया है।' लेखक प्रसून जोशी भी मानते हैं कि बायोपिक को मनोरंजक बनाने के लिए कल्पना का पुट देना जरुरी हो जाता है। प्रसून कहते हैं,'जीवनी लेखन किसी काल्पनिक कहानी लेखन के मुकाबले बहुत मुश्किल है। उसे लिखने के लिए काफी रिसर्च करना पड़ता है। उस इंसान से जुड़ी छोटी से छोटी बारीकियों को ध्यान में रखना पड़ता है। 'भाग मिल्खा भाग' लिखने के दौरान मैंने चुस्त पटकथा लिखने के लिए तथ्यों के साथ कल्पना मिलाई, क्योंकि मैं मनोरंजक फिल्म लिखना चाहता था। इस फिल्म में अनेक पात्र काल्पनिक हैं। काल्पनिक दृश्य यथार्थ को धार प्रदान करें तो उनका समावेश करना उचित है। कोई भी बायोपिक पूरी तरह यथार्थपरक नहीं हो सकता, इस तरह वृत्तचित्र बनाया जा सकता है।' 
कभी-कभी कड़वी सच्चाई से उठने वाले संभावित विवादों के डर से बायोपिक निर्माताओं को समझौते करने पड़ते हैं। ऐसा ही 'एम एस धोनी' के निर्माताओं को करना पड़ा था। फ़िल्म' को विवादों से बचाने के लिए फ़िल्म के अहम् हिस्से को ऐन वक़्त पर हटा दिया गया। दरअसल,'एम एस धोनी' के टीज़र रिलीज के बाद तीन सीनियर खिलाडियों को टीम से हटाने से जुड़े एक डायलॉग ने काफी चर्चा बटोरी। इस डायलॉग के कारण फ़िल्म से विवादों के जुड़ने का डर था जिस कारण रिलीज के ठीक पहले फिल्म के उस मशूहर डायलॉग को हटाने का निर्णय किया गया। इस विवाद से बचने के बाद जब महेंद्र सिंह धोनी से उनके बायोपिक 'एम एस धोनी' के सीक्वल की बात की गयी,तो उन्होंने साफ इशारा किया कि उनके बायोपिक का कोई सीक्वल नहीं होगा। उनका मानना है कि इससे काफी विवाद खड़ा हो सकता है।
आमतौर पर बायोपिक फ़िल्में रियल लाइफ की उन्हीं शख्सियतों पर बनायी जाती हैं जिनका जीवन रोचक और प्रेरक तथ्यों से भरा हो या जो विवादों में रहे हों। ऐसे में, विवादित शख्सियतों के बायोपिक पर होने वाले विवादों को दरकिनार नहीं किया जा सकता है। आने वाले दिनों में ऐसी ही कुछ विवादित शख्सियतों की बायोपिक दर्शकों के सामने होंगी जिनमे संजय दत्त और हसीना पारकर की बायोपिक है। संजय दत्त से जुड़े तमाम विवादों को दर्शक रणबीर कपूर अभिनीत बायोपिक 'संजय दत्त' में देखेंगे,तो वहीँ विवादों में रही दाऊद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर के व्यक्तित्व को बायोपिक 'हसीना' में जीती नजर आएंगी श्रद्धा कपूर । दरअसल,इन फिल्मों से विवाद का जुड़ा होना तय है क्योंकि ये फिल्में ही विवादित शख्सियतों की बायोपिक हैं। ऐसी ही एक विवादित शख्सियत की बायोपिक में विद्या बालन भी नजर आएंगी। विद्या सिल्वर स्क्रीन पर एक ऐसी लेखिका के जीवन को जीने जा रही हैं जो विवादों में रही हैं। यह हैं अंग्रेजी की प्रसिद्ध लेखिका कमला सुरैया। कमला सुरैया की बायोपिक को लेकर विद्या बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि वे भविष्य में इस फ़िल्म से जुड़ने वाले विवादों के लिए खुद को तैयार कर चुकी हैं। दरअसल,भारत में अभी भी कड़वी सच्चाइयों से दूर भागने की मानसिकता है। दर्शकों का कुछ वर्ग समाज के यथार्थ से दूर भागने की कोशिश करता है जिस कारण फ़िल्मकार जब भी बायोपिक में सच्चाई दिखाने की कोशिश करते हैं,उन्हें विवादों से दो-चार होना पड़ता हैं। 'पान सिंह तोमर' के निर्देशक तिग्मांशु धुलिया कहते हैं,' जब हम हॉलीवुड में देखते हैं कि किसी उल्लेखनीय व्यक्ति पर बायोपिक फिल्में बन रही हैं, तो हम काफी खुश होते हैं और उसकी प्रशंसा भी करते हैं और सोचते हैं कि ऐसी फिल्में भारत में बने। लेकिन सच्चाई यह है कि हम जिस तरह के ढांचे में जकड़े हैं, ऐसी फिल्में बनाना संभव नहीं है। क्योंकि हमारी कोशिश दर्शकों तक पूरी सच्चाई पहुंचाने की नहीं होती बल्कि हम पर लोकप्रिय ढांचे में खुद को ढालने का दबाव होता है।'
आने वाली बायोपिक फ़िल्में-
*हसीना(दाऊद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर के जीवन पर आधारित)
*संजय दत्त (संजय दत्त के जीवन से जुडी)
*पैड मैन ( महिलाओं के लिए सस्ते सेनिटरी पैड  मुहैया कराने वाले अरूणांचालम मुरुगानानथम के जीवन पर आधारित)
*मुरलीकांत पेटकर(पैरालंपिक में भारत के लिए गोल्ड जीतने वाले एथलीट मुरलीकांत पेटकर के जीवन पर आधारित)
*सारे जहां से अच्छा(अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा के जीवन पर आधारित)
*मंटो (लेखक सआदत हसन मंटो के जीवन पर आधारित)
*सिमरन (गुजराती एन आर आई नर्स संदीप कौर के जीवन पर आधारित)
बायोपिक से जुड़े 'विवाद'
*नीरजा भनोत की बायोपिक 'नीरजा' को पैन एम 73 में नीरजा भनोत की साथी क्रू मेंबर रही नुपुर अबरोल ने रियल से अधिक फिक्शनल बताया। नुपुर के इस वक्तव्य ने सफल और सराही जा रही 'नीरजा' को भी विवादों से जोड़ दिया।
*एक घटनाक्रम में लुधियाना की बलजिंदर कौर ने सरबजीत की असली बहन होने का दावा किया है। उन्होंने दलबीर कौर की भूमिका निभा रही ऐश्वर्या राय बच्चन और निर्देशक उमंग कुमार को लीगल नोटिस भी भेजा और 'सरबजीत' पर रोक लगाने की बात कही थी।
* मशहूर लेखिका अमृता प्रीतम के बायोपिक की चर्चा काफी दिनों से चल रही है,मगर कुछ आपत्तियों के कारण अभी तक इस फ़िल्म का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है।अमृता प्रीतम के पौत्री ने इस फ़िल्म के निर्माण पर आपत्ति जतायी है। उनके अनुसार अमृता प्रीतम नहीं चाहती थीं कि उनकी आत्मकथा का कमर्शियल उपयोग किया जाए।

Monday, December 5, 2016

...कि पैसा बोलता है !

-सौम्या अपराजिता
इन दिनों हर तरफ 'रुपए','बैंक','हजार','सौ' जैसे शब्द छाए हुए हैं। यूं तो पैसा सबके जीवन में बेहद मायने रखता है,मगर इन दिनों तो ऐसा लगता है...मानो सबकी चिंता पैसों के इर्द-गिर्द सिमट-सी गयी है। ज्ञात तथ्य है कि नोटबंदी के सरकारी फैसले के कारण ऐसा हुआ है। इस फैसले के कारण जहां देश की अर्थनीति में बड़ा परिवर्तन आया है,वहीँ फिल्मों में 'पैसे' और 'रुपए' से जुड़े गीत और फ़िल्में भी प्रासंगिक हो गयी हैं।
आजकल जिसके पास पांच सौ और दो हजार के नए नोटों की श्रृंखला आ गयी है उनसे चिढ़ते हुए बैंकों में लंबी लाइन लगने वाले लोग यही गुनगुना रहे होंगे-'काहे पैसे पे इतना गुरुर करे.... हे हे चार पैसे क्या मिले क्या मिले भई क्या मिले वो ख़ुद को समझ बैठे ख़ुदा।' इन दिनों हर तरफ पैसे की माया का जादू है। दरअसल,पैसे की माया अपरम्पार है। शायद...इसी दर्शन को 'काला बाज़ार' का यह गाना आगे बढ़ाता है-'ठन ठन की सुनो झंकार कि पैसा बोलता है।' वैसे पैसा अगर जरुरत है,तो वह अब मुसीबत भी बन गया है। तभी तो....जरुरत से ज्यादा पैसा हो,तो उसे बैंक में जमा कराने की मुसीबत और कम हो,तो घर खर्च के लिए बैंक के चक्कर लगाने की मुसीबत। ऐसे में.. बरबस ही 'कर्ज' के इस गीत की याद आ जाती है-'पैसा ओ पैसा ये हो मुसीबत न हो मुसीबत।'
जहां..आजकल पांच सौ और दो हजार रुपए की चर्चा हर तरफ छायी हुई है,वहीँ बीते जमाने में 'पांच रूपया,बारह आना' के भी अपने मायने थे...तभी तो 'चलती का नाम गाड़ी' के इस गीत के पीछे बेहद रोचक घटना जुड़ी हुई है। 'चलती का नाम गाड़ी' के नायक किशोर कुमार इन्दौर के क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ते थे। कॉलेज की कैंटीन से उधार लेकर खुद खाना और दोस्तों को खिलाना उनकी आदत थी। वह ऐसा समय था जब 10-20 पैसे की उधारी भी बहुत मायने रखती थी। किशोर कुमार पर जब कैंटीन वाले के पांच रुपए बारह आना उधार हो गए,तो वह उधार मांगे जाने पर किशोर कैंटीन में बैठकर ही टेबल पर ग्लास और चम्मच बजा-बजाकर पाँच रुपया बारह आना गा-गाकर कई धुन निकालते थे और कैंटीन वाले की बात अनसुनी कर देते थे। बाद में 'चलती का नाम गाड़ी' में उन्होंने गीत में इस 'पांच रुपया बारह आना' वाले गीत को बहुत ही खूबसूरती से इस्तेमाल किया।
रोचक है कि 'नोटबंदी' के मौजूदा दौर में जब प्लास्टिक मनी का महत्त्व बढ़ रहा है...ऐसे में,'दुश्मन' का गीत 'पैसा फैंको तमाशा देखो' कुछ हद तक अप्रासंगिक हो गया लगता है। साथ ही,अब शायद ही कोई भूलकर भी 'जॉनी गद्दार' के इस गीत को गुनगुनाने की हिम्मत करेगा-'कैश मेरी आँखों में,कैश मेरी साँसों में'। आखिर...अब जल्द ही कैश का खेल ख़त्म जो होने वाला है।हालांकि...कैश में न सही,प्लास्टिक मनी के रूप में ही सही,पैसे का दबदबा बना हुआ है। तभी तो,जब प्रेमी अपनी प्रेमिका की बढ़ती मांगों से परेशान हो जाता है,तो अक्सर कहता है-'क्यों पैसा-पैसा करती है,क्यों पैसे पे तू मरती है!' सच कहें तो प्यार,मोहब्बत,रिश्ते....सब इस भौतिक युग में पैसे का खेल बनकर रह गए हैं,तभी तो गुलज़ार ने 'कमीने' के गीत में लिखा है-'कौड़ी- कौड़ी पैसा पैसा ..पैसे का खेल.. चल चल सड़कों पे होगी ठैन-ठैन।' ऐसे में...निष्कर्ष तो एक ही है..... ' न बीवी न बच्चा, न बाप बड़ा न भैया द होल थिंग इज दैट कि सबसे बड़ा रुपैया।' सच में....'पैसा ये पैसा,कोई नहीं ऐसा।'
बॉक्स के लिए:
पैसे का महिमामंडन करते फिल्मों के शीर्षक-
*पैसा
*पैसा ये पैसा
*पैसा ही पैसा
*पैसा वसूल
*पैसा या प्यार
*सबसे बड़ा रुपैया
*मोह माया मनी
*अपना सपना मनी मनी
*आमदनी अठन्नी,खर्चा रुपैया
काले धन के मुद्दे को उजागर करती फिल्में-
*खोंसला का घोसला
*काला बाज़ार
*ब्लड मनी
*कॉर्पोरेट
*जन्नत
पैसे के महत्त्व को बताते प्रसिद्ध संवाद-
*'आज मेरे पास बंगला है, गाड़ी है, बैंक बॅलेन्स है, तुम्हारे पास क्या है!' (दीवार)
* 'तू लड़की के पीछे भागेगा, लड़की पैसे के पीछे भागेगी... तू पैसे के पीछे भागेगा, लड़की तेरे पीछे भागेगी।' ( वॉन्टेड)
*'पैसा पैसे को खींचता है।'(जन्नत)
*'पैसे की कैपिसिटी,जीने की स्ट्रेंथ,अकाउंट का बैलेंस और नाम का खौफ कभी ख़त्म नहीं होना चाहिए।' (वन्स अपॉन अ टाइम इन मुम्बई दोबारा)
*'पैसे बहाने से अच्छा है,खून बहाओ।'(औरंगजेब)

Thursday, September 15, 2016

अतुलनीय रजनीकांत...

-सौम्या अपराजिता

रजनीकांत का व्यक्तित्व,उनकी लोकप्रियता का दायरा और दर्शकों के बीच उनकी स्वीकार्यता का प्रभाव इतना गहरा और व्यापक है कि भाषा,क्षेत्र और समय की दीवारें टूट जाती हैं। रजनीकांत का प्रभावशाली व्यक्तित्व पूरे भारत को एक सिरे से बांधता है...उनकी फ़िल्में उत्तर-दक्षिण की दूरियों को पाटती हैं,विदेश में बसे भारतीयों में देश प्रेम का संचार करती हैं,तो दर्शकों में 'आम से खास' बनने के जज्बे का संचार करती हैं। दरअसल,'रजनीकांत' सिर्फ एक अभिनेता का नाम नहीं रहा,बल्कि यह 'विशेषण' बन गया है।भला... किसी अभिनेता की लोकप्रियता का इससे बड़ा प्रमाण क्या हो सकता है!

दरअसल,रजनीकांत की बेपनाह लोकप्रियता और प्रभाव की विशेष वजह है। दरअसल,दूसरे लोकप्रिय अभिनेताओं की तरह रजनीकांत व्यावसायिक लाभ के लिए अपनी ऑन स्क्रीन छवि को बेचते नहीं हैं। गौर करें तो लोकप्रियता के सोपान पर अमिताभ बच्चन भी हैं,शाहरुख़ खान भी हैं और सलमान खान भी।...मगर उन सबसे अलग हैं रजनीकांत...। रजनीकांत की तरह दूसरे अभिनेता भी स्क्रीन पर अन्याय के खिलाफ लड़ते हैं और असहायों की सहायता करते दिखते हैं,मगर जब उस अभिनेता की रियल लाइफ की बात आती है,तो वे अक्सर विज्ञापनों में शराब,गुटखा या किसी अन्य उत्पादों को बेचते हुए दिख जाते हैं जिससे असहायों की मदद करने वाले आम आदमी के हीरो वाली उनकी छवि धूमिल होने लगती है। वे सिर्फ व्यावसायिक अभिनेता के रूप में दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनकर रह जाते हैं। वहीँ दूसरी तरफ रजनीकांत अपनी अभिनय कला को सिर्फ फिल्मों तक सीमित रखते हैं जिससे उनकी पहचान में सिर्फ उनके प्रभावशाली व्यक्तित्व की झलक दिखती है जो उन्हें दूसरे  व्यावसायिक अभिनेताओं  से अलग दर्शकों के लिए पूजनीय बनाती है। गौरतलब है कि 2006 में एक 'कोला-कंपनी' ने रजनीकांत को अपना ब्रांड-अम्बैसडर बनने का प्रस्ताव दिया था, किन्तु 2 करोड़ का प्रस्ताव होने के बावजूद रजनीकांत ने उस कंपनी को मीटिंग के लिए समय तक नहीं दिया। उल्लेखनीय है कि रजनीकांत फ़िल्मों के बाहर कभी मेकअप में नहीं दिखते। वे न तो टेलीविजन रियलिटी शो की शोभा बनना पसंद करते हैं और न ही अवार्ड शो या स्टेज पर प्रस्तुति देते हैं। निजी जीवन में रजनीकांत स्वयं को 'लार्जर देन लाइफ' बनाकर प्रस्तुत नहीं करते। वे दर्शकों को कहानियाँ बेचना पसंद करते हैं, पर कभी भी खुद की बोली नहीं लगाते। कैमरे से बाहर होते ही वे अपने सामान्य रूप में आ जाते हैं।

रजनीकांत का अपने दर्शकों के साथ अद्भुत परस्पर रिश्ता है। वे दर्शकों का शोषण नहीं करते हैं। वे दर्शकों के विश्वास की रक्षा के लिए कृत संकल्पित हैं। लोकप्रियता के शिखर पर भी रजनीकांत ने अपने आपको आभामंडल में छिपाने की कोशिश नहीं की, बल्कि अपने द्वारा निभाए गए 'लार्जर दैन लाइफ' चरित्रों को भी अपनी जमीनी पहचान से जोड़े रखा है। इसीलिए दर्शक जब फ़िल्म में उनके चरित्र विशेष के लिए तालियाँ बजा रहे होते हैं, तो कहीं न कहीं वह तालियाँ रजनीकांत को मिल रही होती हैं। रजनीकांत की कोशिश होती है कि उनके चरित्र में भी लोग उनकी पहचान कर सके, उस रजनीकांत की पहचान जो उनके बीच उनकी तरह का है। शूटिंग पर समय के पाबंद, साथी कलाकारों से अच्छा व्यवहार, प्रशंसकों का हाथ जोड़ कर अभिवादन करना उनकी पहचान है।

यह जीवित किंवदंती बन चुके रजनीकांत का अपने प्रशंसकों के साथ बंधे अटूट रिश्ते का ही असर है कि उनकी फिल्मों की रिलीज-डेट पर कई बड़ी कंपनियां 'छुट्टी' की घोषणा कर देती हैं क्योंकि उन्हें इस बात की आशंका ही नहीं, बल्कि पूरा ज्ञान है कि अगर छुट्टी नहीं भी की गयी तो तमाम कर्मचारी 'बीमारी' या कोई और 'बहाना' करके छुट्टी ले ही लेंगे। उनके लिए रजनीकांत की फ़िल्म देखने के कोई जरूरी शर्त नहीं होती है क्योंकि भगवान के दर्शन ही 'भक्त' के लिए पर्याप्त होते हैं। रजनीकांत की उपस्थिति मात्र दर्शकों को यह विश्वास दिलाने में सक्षम होती है कि फ़िल्म में जो कुछ भी होगा...सर्वोत्तम होगा। साथ ही,उनके चलने की खास शैली और संवाद अदायगी का अनोखे अंदाज को निहारना दर्शकों के लिए सोने पे सुहागा जैसा होता है। रोचक तथ्य हऐ कि बालों को हाथ से झटकना, हाथों-उंगलियों को संगीत की टेक पर आगे लाकर घुमाना, कोट-पेंट में हाथ लटकाना और लहराती चाल में चलना जैसी अस्सी के दशक वाली सिनेमाई हरकतें आज भी रजनीकांत की स्टाइल बनी हुई है। 'किंग ऑफ स्टाइल' के रूप में अपने प्रशंसकों के बीच पहचान बना चुके रजनीकांत रूपहले परदे पर जितने भी स्टाइलिश लगें, लेकिन निजी जीवन में उनके जैसी साधारण वेश-भूषा वाला सितारा शायद ही सिने जगत में मिले। स्क्रीन पर हमेशा जवान नजर आनेवाले रजनीकांत निजी जीवन में कभी जवान दिखने की कोशिश भी नहीं करते हैं।

सच कहें तो रजनीकांत अपने चिरपरिचित अंदाज में वर्षों से दक्षिण भारतीय फ़िल्म उद्योग की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी बने हुए हैं। पिछले दिनों प्रदर्शित हुई 'कबाली' की बेपनाह सफलता ने एक बार फिर रजनीकांत को सिर्फ दक्षिण भारत का ही नहीं,बल्कि भारतीय फ़िल्म उद्योग के 'थलाइवा (सेनापति)' के रूप में स्थापित कर दिया है। 'कबाली' के क्रेज ने यह सिद्ध कर दिया है कि पैंसठ वर्षीय बेहद साधारण व्यक्तित्व वाले इस मितभाषी और विनम्र अभिनेता ने लोकप्रियता और सफलता का वह शिखर छू लिया है जो अकल्पनीय,अतुलनीय और अद्भुत है।

क्रेज कबाली का:

*'कबाली' भारत की ऑल टाइम बिगेस्‍ट ओपनर फि‍ल्‍म बन गई है। यह रजनीकांत के करियर की 159वीं फि‍ल्‍म है, जो एक गैंगस्‍टर के जीवन पर आधारित है। इसमें राधिका आप्‍टे, धनशिखा और कलाईरासन प्रमुख भूमिका में हैं।

*22 जुलाई को रिलीज हुई फिल्म 'कबाली' ने दुनिया भर में अभी तक 600 करोड़ से ज्यादा का व्यवसाय किया है। आंकड़ों के मुताबिक 'कबाली' ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर अबतक 211 करोड़ का व्यवसाय किया है जिसमें 40 करोड़ रुपए उत्तर भारत से हैं।

* 'कबाली' पूरी दुनिया में लगभग 8000-10,000 स्‍क्रीन पर रिलीज की गई है। अमेरिका में 480 स्‍क्रीन, मलेशिया में 490 और गल्‍फ देशों में 500 से ज्‍यादा स्‍क्रीन पर यह फि‍ल्‍म दिखाई जा रही है। चीन में यह 4500 स्क्रीन पर रिलीज की गयी है। संभवत: ‘कबाली’ एकमात्र भारतीय फिल्म है, जो एशिया के सभी देशों में एक साथ रिलीज हो रही है। 

रजनीकांत:सिफर से शिखर तक
रजनीकांत का जन्म 12 दिसंबर, 1950 को बेंगलुरू में हुआ। उनके बचपन का नाम शिवाजी राव गायकवाड़ है। उनके पिता रामोजी राव गायकवाड़ एक हवलदार थे। मां जीजाबाई की मौत के बाद चार भाई-बहनों में सबसे छोटे रजनीकांत को अहसास हुआ कि घर की माली हालत ठीक नहीं है। बाद में उन्होंने परिवार को सहारा देने के लिए कुली और बस कंडक्टर का भी काम किया।अभिनय में दिलचस्पी के चलते उन्होंने 1973 में मद्रास फिल्म संस्थान में दाखिला लिया और अभिनय में डिप्लोमा लिया।
रजनीकांत की मुलाकात एक नाटक के मंचन के दौरान फिल्म निर्देशक के. बालाचंदर से हुई थी, जिन्होंने उनके समक्ष उनकी तमिल फिल्म में अभिनय करने का प्रस्ताव रखा। इस तरह उनके करियर की शुरुआत बालाचंदर निर्देशित तमिल फिल्म 'अपूर्वा रागंगाल' (1975) से हुई, जिसमें वह खलनायक बने। यह भूमिका यूं तो छोटी थी, लेकिन इसने उन्हें आगे और भूमिकाएं दिलाने में मदद की। इस फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया था। करियर की शुरुआत में तमिल फिल्मों में खलनायक की भूमिकाएं निभाने के बाद वह धीरे-धीरे एक स्थापित अभिनेता की तरह उभरे। तेलुगू फिल्म 'छिलाकाम्मा चेप्पिनडी' (1975) में उन्हें मुख्य अभिनेता की भूमिका मिली। उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। कुछ सालों में ही रजनीकांत तमिल सिनेमा के महान सितारे बन गए और तब से सिनेमा जगत में एक प्रतिमान बने हुए हैं।

रजनीकांत:रोचक तथ्य
* रजनीकांत एक वक्त बस कंडक्टर का भी काम करते थे और यात्री सड़क पर उनकी बस का इंतजार करते थे। लोग उनके टिकट देने तथा खुले पैसे लौटाने के अंदाज से प्रभावित रहते थे। वह अपने अंदाज में मुसाफिरों को टिकट देते थे और खुले पैसे देते थे। उनके मशहूर अंदाज के चलते ही लोग उनकी बस का इंतजार करते थे और सामने से अनेक बसें खाली जाने देते थे। 

* संघर्ष के दिनों में रजनीकांत ने बेंगलुरू में मैसूर मशीनरी में भी कुछ दिन काम किया और चावल के बोरे ट्रकों में लादने का भी काम किया जिसके लिए उन्हें 10 पैसे प्रति बोरा मिलता था। 

*जब भी रजनीकांत की कोई फिल्म रिलीज़ होती है उनके फैंस एसोसिएशन से जुड़े लोग रजनीकांत के पोस्टर को दूध से नहलाते हैं।

*रजनीकांत को समर्पित 1,50,000 से अधिक फैन क्लब हैं जो दुनिया भर में फैले हुये है।

* वे देश के एकमात्र ऐसे फिल्म अभिनेता है जो कि सीबीएसई की 12वीं कक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल किए हैं। बस कंडक्टर से सुपरस्टार तक उनकी जीवन यात्रा का पाठ छात्रों को पढ़ाया जाता है।

* रजनीकांत अपनी सादगी के लिए जाने जाते हैं। निजी जीवन में आम आदमी की तरह रहते हैं। रोचक घटना है कि एक बार एक औरत ने सुपरस्टार रजनीकांत को भिखारी समझकर 10 रूपए का नोट थमा दिया था।दरअसल,रजनीकांत अपने सादे पहनावे में एक मंदिर गए थे जहां दर्शन के बाद वे मंदिर के किनारे थोड़ी देर के लिए बैठ गए। तभी वहां से एक महिला गुजरी और उसने रजनीकांत को भिखारी समझते हुए 10 रूपए का नोट भीख में दिया।

लोकप्रिय और सफल फ़िल्में -
*कबाली
*रोबोट
*शिवाजी
*लिंगा
*कोच्चदियां
*बाशहा
*थालापट्ठी
*चंद्रमुखी
*मुत्तु
*राणा

प्रमुख हिंदी फ़िल्में:
*हम
*अंधा कानून
*जॉन जॉनी जनार्दन
*चालबाज़
*फूल बने अंगारे
*असली नकली

अमिताभ बच्चन:
इतना लंबा वक्त बीत गया है रजनी को स्टार बने, लेकिन आज भी वो पहले जैसे ही नर्म, सरल, ईमानदार और जमीन से जुड़े हुए हैं। मैं रजनीकांत के गुणों से सदा प्रभावित रहा हूं। रजनीकांत सही मायनों में धरतीपुत्र हैं।

सचिन तेंदुलकर: रजनीकांत का उत्साह अद्भुत है, जो आस-पास के अन्य लोगों के अन्दर भी उत्साह जगा देता है।