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Saturday, October 26, 2013

राम और रणवीर की नजदीकियां....

हिंदी फिल्मों में प्रवेश के समय से ही रणवीर सिंह में सक्षम और समर्थ अभिनेता की छवि देखी गयी। उनके व्यक्तित्व का हरफनमौला अंदाज दर्शकों और निर्माता-निर्देशकों को भा गया। दिग्गज निर्देशकों को रणवीर में अपनी फिल्म के नायक की झलक दिखने लगी। प्रतिष्ठित निर्देशक संजय लीला भंसाली का ध्यान भी रणवीर पर गया और उन्होंने रणवीर के व्यक्तित्व को केंद्र में रखकर 'राम-लीला' के राम की भूमिका गढ़ दी। राम की इस भूमिका को रणवीर ने भी आत्मसात कर लिया।समर्पित और उत्साही अभिनेता रणवीर सिंह से सौम्या अपराजिता की बातचीत-

* 'राम-लीला' की झलकियां जब से जारी की गयी हैं तब से ही फिल्म को लेकर उत्सुकता बढ़ गयी है। आपको व्यक्तिगत रूप से कैसी प्रतिक्रिया मिल रही है?
-कमाल का रिस्पांस मिल रहा है। इतने अच्छे रिस्पांस की उम्मीद नहीं थी। हालांकि, हमें पता था कि हमारा  ट्रेलर बहुत कड़क बना है,पर जैसा रिस्पांस मिल रहा है वह बेहद भावुक कर देने वाला है। संजय सर और मैंने ऐसे रिस्पांस की उम्मीद नहीं की थी। फिल्म इंडस्ट्री के लोगों को ट्रेलर और गानें अच्छे लगे हैं। ऑडियंस को भी अच्छा लगा है। हर तरफ से पॉजिटिव रिस्पांस मिल रहा है। मुझे पता चला है कि यू ट्यूब पर 'राम-लीला' के ट्रेलर ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। लोग बार-बार ट्रेलर और गाने देख रहे हैं।बेहद भावुक और उत्साहित हूं।

*सबकी उम्मीदें भी काफी बढ़ गयी हैं..!
हां...,पर मुझे पूरा भरोसा है कि 'राम-लीला' लोगों की उम्मीदों पर खरी उतरेगी। जितनी अच्छी और स्ट्रोंग गानों और ट्रेलर में लग रही है उससे कहीं ज्यादा अच्छी और भव्य है 'राम-लीला'।अब तक लोगों को फिल्म के  कैरेक्टर को जानने का मौका नहीं मिला  है। लोगों को उनके इमोशन देखने को नहीं मिले हैं। जब लोग फिल्म में देखेंगे तब उन्हें और मजा आएगा। यह तो सभी जानते हैं कि मिस्टर भंसाली विजुअली कितनी स्ट्रांग फिल्म बनाते हैं। एक्टर से उनके बेहतरीन परफोर्मेंस निकालने में वे माहिर हैं। जो इ
मोशन फिल्म में दिखाए गए हैं..जो बढ़िया-बढ़िया सीन हमने शूट किये हैं वे लोग जब देखेंगे तो उन्हें ऐसा लगेगा कि 'राम-लीला' उनकी उम्मीदों से कही ज्यादा बेहतर फिल्म है। .. क्योंकि मैंने तो फिल्म देखी है इसलिए कह सकता हूं कि गानों और ट्रेलर में अभी तक लोगों ने फिल्म का एक प्रतिशत भी नहीं देखा है।

*करियर के शुरूआती लम्हों में संजय लीला भंसाली का साथ मिलना आपके लिए कितनी बड़ी उपलब्धि है?
बहुत बड़ी बात है। आपको एक बात बताऊँ... जब मैंने फिल्म शुरू नहीं की थी तब मेरी बात  एक बहुत ही सीनियर एक्टर से हो रही थी। तब उन्होंने मुझसे कहा था,' तुम संजय लीला भंसाली के साथ अपनी चौथी फिल्म कर रहे हो,यह तुम्हारे लिए बड़ी बात होगी। मैंने उनके साथ काम किया है और मैं तुम्हें दावे के साथ बता सकता हूं कि तुम्हें अंदाजा नहीं होगा कि यह कितनी बड़ी बात है तुम्हारे लिए। उनके साथ काम करने के बाद पता ही तुम्हें इस बात का पता चलेगा।' अब मैं उनकी बात से बिलकुल सहमत हूं । मिस्टर भंसाली ' एलिट ग्रुप ऑफ एक्टर्स' के साथ काम करते आये हैं। ऐसे में अगर आप मिस्टर भंसाली की फिल्म में लीड कर रहे हैं तो यह अपने आप में बड़ा एचीवमेंट है। वह बेस्ट एक्टर के साथ काम करते हैं और बेस्ट एक्टर से बेस्ट परफोर्मेंस निकालते हैं। मैं आपको शब्दों में नहीं समझा सकता कि मेरे लिए कितने सौभाग्य की बात है कि चौथी ही फिल्म में मैं इतने बड़े डायरेक्टर के साथ काम कर रहा हूं।

*तो इतने बड़े डायरेक्टर के साथ काम करने से पहले खुद को तैयार भी करना पड़ा?
-मुझे लगता है कि आप जितनी तैयारियां करेंगे उतने ही आत्मविश्वास के साथ आप सेट पर जायेंगे। मिस्टर भंसाली और मैंने काफी पहले से ही डिसाइड कर लिया था कि शूटिंग से पहले मैं गुजरात के गावों में जाऊंगा। वहां के लोगों से मिलूंगा। थोड़ी बहुत रिसर्च करूँगा कि वो लोग होते कैसे हैं? कैसे बात करते हैं? उनके चाल-ढाल कैसे हैं? हालांकि, मिस्टर भंसाली जो दुनिया क्रिएट करते हैं वह उनकी अपनी ही दुनिया होती है। ..फिर भी गुजरात का जो फ्लेवर वह चाहते थे उसे लाने के लिए तैयारी करनी पड़ी।एक हफ्ते गुजरात रहा। छोटे-छोटे गावों में जाकर वहां के लोगों से बातें की। विडिओ लिए।फोटो लिए। जाना कि वे क्या खाते हैं? कैसे बात करते हैं? अलग-अलग विषयों पर उनके क्या व्यूज हैं? काफी सीखने को मिला। सबसे ज्यादा बोलने का एक खास लहजा सीखने को मिला। उस लहजे को मैंने मिस्टर भंसाली के सामने प्रेजेंट किया जो उन्हें बेहद पसंद आया। एक मिनट के अन्दर उन्होंने बोल दिया कि आप यह लहजा अपनी बोली में ले आइयेगा।... फिर दीपिका आयीं। दीपिका के साथ हमने वर्कशॉप किये। वह भी बहुत हेल्पफुल रहा क्योंकि दीपिका और मैं फिल्म में आने से पहले एक-दूसरे को जानते नहीं थे। इतनी बड़ी और पैशनेट लव स्टोरी में काम करने के पहले एक-दूसरे को जानना जरुरी था।

*सह-कलाकार के रूप में दीपिका कितनी मददगार रहीं?
-सबसे बड़ी बात तो यह है कि वे बहुत हार्ड वर्किंग हैं। वे एक दिन में सुबह से लेकर रात तक इतनी सारी चीजें कर लेती हैं कि कमाल है! मैं तो उनको देखकर थक जाता हूं। मल्टी टास्किंग में वे एक्सपर्ट हैं। उनमें कांफिडेंस है। ये तो भगवान् की देन है कि वे इतनी सुप्रिमली कॉंफिडेंट हैं। उन्हें गलत होने का डर नहीं रहता। अपने काम के प्रति लगन और उत्साह है उनमें। उनकी डिटेलिंग भी कमाल की है। चाहे वह कॉस्टयूम की  डिटेल हो,लाइन की डिटेल हो या रिएक्शन की डिटेल...वे सब पर नजर रखती हैं। वे बिलकुल ऐसी नहीं है कि सेट पर आयें और डायरेक्टर से कहें कि आप बताइए कि क्या करना है? वे खुद का टेक लेती हैं । वे बहुत हेल्पफुल हैं। अगर आपको शॉट कंधे से ऊपर का है तो वे अपने चेहरे के रिएक्शन से शॉट देने में मदद करती हैं।माशाल्लाह! वे इतनी बड़ी स्टार हैं, पर वे स्टार वाली फीलिंग नहीं देतीं हैं। जब सेट पर आती हैं तो बहुत कोआपरेटिव रहती हैं। मैं सच में उन्हें बहुत एडमायर करता हूं।

*राम-लीला में आप लीला के राम है। निजी जीवन में राम की भूमिका से कितना इत्तेफाक रखते हैं?
-आप यकीन नहीं करेंगी कि जब मैंने इस कैरेक्टर के बारे में जाना,तो मुझे यकीन नहीं हुआ कि कोई कैरेक्टर मेरे इतना करीब कैसे हो सकता है। मेरे सामने 'राम-लीला' के स्क्रिप्ट की पहली ही नैरेशन होती है और इस कैरेक्टर की एंट्री के बारे में अंग्रेजी के कुछ शब्द का यूज़ किया जाता है। वे शब्द थें-लाउड,ड्रामेटिक,चीप,कलरफुल,फ्लैमब्लौयेंट। मुझे लगा कि इतना कमाल कैरेक्टर  है  कि मैं इसमें काफी अच्छा कर पाउँगा। वहीँ से मेरा उत्साह बढ़ गया। फिर जब नैरेशन के दौरान मैंने सुना कि दूसरे कैरेक्टर राम के बारे में क्या बाते कर रहे हैं..किस तरह उसका परिचय दे रहे हैं..तो मैंने सोचा कि यह तो काफी हद तक मेरे जैसा ही है। मुझे लगा कि अगर मैं यह मान लूं कि रणवीर सिंह के लिए ये वैसा बोल रहे हैं,तो गलत नहीं होगा। आलरेडी.. यह कैरेक्टर पेपर पर मेरे लिए लिखा गया था और मुझे कास्ट भी किया गया। कभी- कभी ही ऐसा होता है कि एक एक्टर और कैरेक्टर की पर्सनालिटी इस हद तक एक-दूसरे से मिलती हो। मैं अपनी किस्मत मानता हूं कि ऐसा कैरेक्टर मिस्टर भंसाली ने मुझको दिया।

*फिर तो राम के कैरेक्टर में ढलना आसान रहा होगा?
-काफी हद तक आसान रहा।मुझे बाद में लगा कि मिस्टर भंसाली अपने कैरेक्टर में  एक एक्टर की पर्सनालिटी को ले आते हैं। वे अपनी कास्टिंग के बारे में बहुत सोचते हैं और फिर एक एक्टर को कास्ट करते हैं।..और फिर एक्टर की पर्सनालिटी को लेकर वे अपने कैरेक्टर को स्क्रीन पर दर्शाते हैं। इसीलिए उनकी फ़िल्में  इतनी रियलऔर आर्गेनिक लगती हैं।

*'राम-लीला' के प्रति उत्साह इसलिए भी है क्योंकि इसकी पैकेजिंग काफी आकर्षक लग रही है। आपकी नजर में फिल्म के लिए उसकी अच्छी पैकेजिंग कितनी जरुरी है?
- फिल्म की पैकेजिंग तो बहुत जरुरी है। अगर दर्शक वीकेंड पर डेढ़ सौ रूपये देकर सिनेमा हॉल में जा रहा है तो क्यों न वह एक विजुअली भव्य फिल्म देखे। फिल्म आकर्षक लगनी चाहिए। फिल्म देखने से पहले उत्साह होना चाहिए कि स्क्रीन पर विशाल और बड़ी दुनिया देखने को मिलेगी।..और मिस्टर भंसाली की तरह भव्यता और रंग कोई और स्क्रीन पर लेकर नहीं आ पाता है। मिस्टर भंसाली की फिल्म का एक-एक फ्रेम ख़ूबसूरत लगता है। ऐसे लगता है जैसे एक पोएट्री है। ऐसा पूरी टीम की मेहनत और लगन से ही हो पाता है। एक-एक फ्रेम सेट करने में कभी कभी पूरा दिन लग जाता है लेकिन जब वह स्क्रीन पर आता है तो उसका जो प्रभाव होता है वह कमाल का होता है। एक फिल्म के विजुअल में कुछ बात होनी चाहिए। पैसे की वैल्यू दिखनी चाहिए।कभी-कभी मैं कोई फिल्म देखने जाता हूं, तो कई बार ऐसा लगता है कि मेरे साथ धोखा हुआ है। सोचता हूं कि यार..ये कैसा प्रोडक्शन वैल्यू है? कैसे शूटिंग की है? एक दर्शक के रूप में मेरी ऐसी राय होती है क्योंकि मैं हर हिंदी फिल्म देखता हूं।' राम- लीला' अच्छी और आकर्षक दिख रही है, तो यह फिल्म के लिए प्लस पॉइंट है। अगर इस वजह से भी लोग फिल्म देखने आये तो मुझे तो बहुत ख़ुशी होगी।

* आपके करियर और जीवन ' राम- लीला' कितनी महत्वपूर्ण है?
-वैसे तो मेरे लिए  हर फिल्म इम्पोर्टेन्ट है,पर 'राम-लीला' बहुत खास है। 'राम- लीला' इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इतने बड़े कैनवास पर मैं पहली बार काम करने का मौका मिला है। और मेरा ऐसा भी मानना है कि मेरी और दीपिका की पेयरिंग भी काफी स्पेशल है। पहली बार लोग हम दोनों को स्क्रीन पर साथ दिखेंगे। मैं उनके साथ और भी फ़िल्में करना चाहता हूं। 'राम-लीला' हमारी पेयरिंग की पहली क़िस्त है। कह सकता हूं कि 'राम-लीला' मेरे लिए तो मेरी लाइफ की सबसे बड़ी फिल्म है।
-सौम्या अपराजिता

Saturday, October 19, 2013

रोशन हुआ दीपिका की सफलता का दीप...

दीपिका पादुकोण की सफलता के दीप के तेज प्रकाश से प्रतिस्पर्धी अभिनेत्रियों की आंखें चौंधियां रही हैं। सफलता का पर्याय बन चुकी दीपिका से अब सिर्फ प्रशंसकों की ही नहीं फिल्म विशेषज्ञों की भी उम्मीदें भी बढ़ गयी हैं। 'कॉकटेल', 'रेस 2','ये जवानी है दीवानी' और 'चेन्नई एक्सप्रेस' की अपार सफलता के बाद इस आकर्षक युवा अभिनेत्री की नयी फिल्म 'राम-लीला' प्रदर्शन के लिए तैयार है। प्रशंसनीय है  कि सफलता के शिखर पर पहुंचकर दीपिका और भी निखर गयी हैं। अब उनकी बातचीत में पहले से अधिक आत्मीयता झलकती है। वे ज्यादा सहज और सरल हो गयी हैं। दीपिका से सौम्या अपराजिता की बातचीत-
बधाई...लगातार चार फिल्मों की सफलता के लिए..
-थैंक यू । बेहद खुश हूं कि सबको मेरी कोशिश पसंद आ रही है।
उम्मीद है कि 'राम-लीला' के साथ सफलता का यह सिलसिला जारी रहेगा..
-मुझे भी यही लग रहा है। 'राम-लीला' के ट्रेलर को बहुत अच्छा रिस्पांस मिला है। ट्रेलर लांच के बाद बहुत लोगों ने मुझे मैसेज किया...रणवीर को मैसेज आया...संजय सर को भी मैसेज मिले। सबने बहुत तारीफ़ की है। ट्विटर पर भी अच्छा रिस्पांस मिला है। मेरे लिए यह बहुत स्पेशल फिल्म है। हर एक हीरोइन का सपना होता है कि वह संजय जी के साथ काम करे और उनकी हीरोइन बने। मैं बहुत खुश हूं कि अपने करियर में इतनी जल्दी मुझे उनके साथ काम करने का मौका मिला।उनकी हर फिल्म में जो फीमेल कैरेक्टर होते हैं,यादगार होते हैं।लोग उनको बहुत पसंद करते हैं। उम्मीद है कि इस फिल्म में भी लोग लीला को बहुत पसंद करें। बहुत ही अच्छा एक्सपीरियंस रहा उनके साथ काम करने का। बहुत कुछ सीखने को मिला। मेरे लिए यह बहुत लिबरेटिंग  एक्सपीरियंस था क्योंकि वे एक्टर को  लिबर्टी देते हैं और इनकरेज करते हैं।... तो बहुत मेहनत के बाद तैयार हुई इस फिल्म को सभी एन्जॉय करेंगे..यही उम्मीद है।
चूंकि लीला के चरित्र को संजय लीला भंसाली ने अपनी मां को समर्पित किया है,ऐसे में...  लीला की भूमिका निभाने की जिम्मेदारी कितनी आसान या मुश्किल रही?
-लीला का कैरेक्टर निभाना बड़ी जिम्मेदारी जरूर थी। सभी जानते हैं कि संजय सर के लिए उनकी मां कितनी खास हैं। मैं खुद उनसे काफी बार मिली हूं। वे बहुत ही स्ट्रांग  और एनर्जेटिक लेडी हैं। जब भी सेट पर आती थीं तो वे हमसब को बहुत हंसाती थीं। बहुत बातचीत करती हैं सबके साथ। हर चीज में इंटरेस्ट लेती हैं। उनसे मिलने के बाद मेरे लिए लीला के कैरेक्टर को निभाना बड़ी जिम्मेदारी थी। मुझे उम्मीद है कि मैंने जो भी किया है उससे संजय सर खुश हैं। लीला बहुत चुलबुली और हैप्पी गो लकी टाइप की लड़की है। हमेशा खुश रहती है। वह अपनी शर्तों पर लाइफ जीती है। साथ ही,वह अपने कल्चर और वैल्यूज को भी बहुत रेस्पेक्ट देती है। प्यार और रिलेशनशिप में वह बहुत ट्रेडिशनल है। लीला से मैं काफी हद तक इत्तेफाक रखती हूं।
लीला की भूमिका में ढलने के लिए किस तरह की तैयारियों और अभ्यास से आपको गुजरना पड़ा?
-अभ्यास तो कुछ नहीं करना पड़ा। संजय सर के साथ काम करने के दौरान आप जितनी कम तैयारियां करें उतना ही बेहतर है। क्योंकि वे हमेशा चाहते हैं कि एक्टर इम्प्रोवाइज करें...हमेशा ऑन द स्पॉट कुछ नया करे। बार-बार वही चीज देखकर वे बहुत जल्दी बोर हो जाते हैं। ..तो जितनी कम तैयारी की जाए उतना ही अच्छा है। यही वजह है कि मैं कहती हूं कि 'राम-लीला' की शूटिंग का एक्सपीरियंस मेरे लिए बिलकुल नया और अलग था।
संजय लीला भंसाली की फिल्मों में ढेर सारे रंग होते हैं। 'राम-लीला' में भी उनका वही चिर-परिचित अंदाज दिख रहा है। बड़े कैनवास की ऐसी फिल्म का हिस्सा होने का अनुभव कैसा रहा?
-अनोखा अनुभव था । पहली बार मैं इस स्केल की फिल्म कर रही हूं। चाहे वह सिनेमेटोग्राफी हो,कॉस्टयूम हो या फिर सेट हो...सब कुछ बड़ा और ग्रैंड है। जैसा आपने कहा कि संजय सर की फिल्में अपने बड़े कैनवास के लिए जानी जाती हैं। हरएक फिल्म में उनका यह अंदाज तो दिखता ही है। वे सीन भी बेहद बारीकी से डायरेक्ट करते हैं। बहुत डिटेल में जाकर हर एक एक्स्प्रेसन को निकाल लेते हैं। हर एक शब्द में उनको वैरिएशन चाहिए। उनको हमेशा कुछ नया चाहिए।

चूंकि आपकी चार फिल्में लगातार सफल रही हैं इसलिए सबकी उम्मीदें आपसे बढ़ गयी हैं। 'राम-लीला' के बॉक्स ऑफिस पर बेहतर परिणाम का दारोमदार भी काफी हद तक आप पर ही है..
-मैं समझ सकती हूं कि लोग इस फिल्म से बहुत उम्मीद कर रहे हैं। जैसे मैं हमेशा कहती हूं कि मैं फिल्मों की शूटिंग बेहद एन्जॉय करती हूं। हर फिल्म में इतना कुछ करने को होता है।  मैं अपने-आप को कैमरे के सामने एन्जॉय करती हूं। सौभाग्यशाली हूं कि हर फिल्म में मुझे बहुत अच्छे डायरेक्टर के साथ काम करने का मौका मिला है। मुझसे सबको उम्मीद है ..मैं समझ सकती हूं। जहां तक मेरी बात है तो मेरी उम्मीद है कि लोग लीला के कैरेक्टर को भी उतना ही प्यार देंगे जितना प्यार उन्होंने वेरोनिका,नैना और मीनम्मा को  दिया है।
रणवीर आपसे नए कलाकार हैं ..तो 'राम-लीला' की शूटिंग के दौरान आपने उन्हें क्या सीखाया और उनसे आपने क्या सीखा?
 -मुझे उम्मीद है कि मैंने उन्हें कुछ सिखाया होगा। वे खुद ही बेहद अच्छे एक्टर हैं। पहली फिल्म से ही हमसब जानते हैं कि वे बेहद अच्छे एक्टर हैं। वे अपने कैरेक्टर में पूरी तरह ढल जाते हैं। रणवीर अपने कैरेक्टर में इस हद तक घुस जाते हैं कि आप भूल जाते हैं कि वे 'रणवीर सिंह' हैं। वे बहुत हेल्पफुल एक्टर हैं। ऐसे बहुत कम एक्टर हैं जो सेट पर हेल्प करते हैं।
आप पर फिल्माए गए 'राम-लीला' के गीत 'ढोल बाजे' की खूब चर्चा हो रही है। कैसा था इस गीत के फिल्मांकन का अनुभव?
-पहली बार 'ढोल बाजे' में गरबा कर रही हूं। बचपन से मैंने गरबा करते हुए लोगों को देखा है क्योंकि मेरे कई गुजराती फ्रेंड्स हैं। ..लेकिन कभी मैं नवरात्री के दौरान होने वाले गुजराती सेलिब्रेशन में नहीं गयी हूँ।पहली बार 'ढोल बाजे' की शूटिंग के दौरान ही उसे एक्सपीरियंस किया। मेरे लिए थोडा मुश्किल था क्योंकि रिहर्सल के दौरान मेरे बैक में चोट लग गयी थी। उस चोट के साथ मुझे शूटिंग करनी पड़ी।.. पर मुझे लगता है कि आखिर में जो रिजल्ट आया वह बहुत अच्छा रहा।
यह साल आपके लिए बहुत अच्छा रहा है। अपने शब्दों में इस साल की उपलब्धियों को कैसे बयां करेंगी?
-मुझे दर्शकों ने अलग-अलग कैरेक्टर में पसंद किया। 'कॉकटेल' से आज तक सबने मेरी मेहनत को सराहा है। मैंने कोशिश की है कि हमेशा कुछ नया करूं। बहुत अच्छा लगता है जब उस कोशिश को सभी पसंद करते हैं । सबने इस एक-डेढ़ साल में इतना सारा प्यार दिया है कि वही मेरे लिए मोटिवेशन(प्रेरणा) बन गया है कि आगे जाकर और अच्छा करूं..और अच्छी-अच्छी फिल्में साइन करूं.. और चैलेंजिंग रोल करूं।
'राम-लीला' के बाद और कौन सी फ़िल्मों में दर्शक आपको देख पाएंगे?
-फिलहाल मैं एक छोटी फिल्म पर काम कर रही हूं जिसका नाम ' फाइंडिंग फैनी'। शाहरुख़ के साथ तीसरी फिल्म कर रही हूं  जिसका नाम है 'हैप्पी न्यू इयर'।
-सौम्या अपराजिता